सुखबीर सिंह संधू (Sukhbir Singh Sandhu ) का जीवन परिचय, उम्र, पत्नी, शिक्षा, चुनाव आयुक्त जीवन
सुखबीर सिंह संधू
| जन्म | 6 जुलाई 1963 |
|---|---|
| जन्म स्थान | बाबा बकाला, अमृतसर, पंजाब |
| निवास | नई दिल्ली, भारत |
| शिक्षा | गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर; गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, अमृतसर |
| शैक्षिक योग्यता | एमबीबीएस, एम.ए. (इतिहास), एलएलबी |
| व्यवसाय | भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी, चुनाव आयुक्त |
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सुखबीर सिंह संधू भारत के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और वर्तमान में भारत निर्वाचन आयोग के चुनाव आयुक्त हैं। वे उत्तराखंड कैडर के 1988 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी रहे हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा में लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य किया। उत्तराखंड के मुख्य सचिव, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष और भारत के लोकपाल के सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं देने के बाद मार्च 2024 में उन्हें भारत का चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया।
सुखबीर सिंह संधू का प्रशासनिक अनुभव बुनियादी ढांचे, उच्च शिक्षा, शहरी विकास, राजमार्ग, लोक प्रशासन और शासन व्यवस्था जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ा रहा है। उन्होंने उत्तराखंड, पंजाब और उत्तर प्रदेश सरकारों के साथ-साथ भारत सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।
वे प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ शिक्षा और सार्वजनिक नीति से जुड़े विषयों में भी रुचि रखते रहे हैं। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के बाद इतिहास में स्नातकोत्तर और कानून की शिक्षा प्राप्त की। शहरी सुधार और नगर निकायों की क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर उन्होंने लेख भी प्रकाशित किए हैं।
जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार
सुखबीर सिंह संधू का जन्म 6 जुलाई 1963 को पंजाब के अमृतसर क्षेत्र के बाबा बकाला में हुआ। उनका संबंध पंजाब से है और उनका प्रारंभिक जीवन इसी क्षेत्र के सामाजिक एवं शैक्षणिक वातावरण में बीता।
उनके परिवार का संबंध शिक्षा और सार्वजनिक जीवन से भी रहा है। उनके बारे में उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार उन्होंने प्रारंभिक जीवन में शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया और आगे चलकर चिकित्सा तथा प्रशासन दोनों क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त की।
सुखबीर सिंह संधू के निजी पारिवारिक जीवन से संबंधित विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए उनकी पत्नी और बच्चों से संबंधित विवरण यहां शामिल नहीं किया गया है।
शिक्षा
सुखबीर सिंह संधू की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बहुआयामी रही है। उन्होंने अमृतसर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर से इतिहास विषय में मास्टर डिग्री हासिल की।
इसके अलावा उन्होंने कानून की शिक्षा भी प्राप्त की और एलएलबी की डिग्री हासिल की। इस प्रकार उनकी शैक्षणिक योग्यता में चिकित्सा, इतिहास और कानून तीन अलग-अलग क्षेत्रों का समावेश रहा।
उनकी शिक्षा का प्रभाव उनके प्रशासनिक करियर में भी दिखाई देता है। चिकित्सा और सामाजिक विज्ञान की पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया और बाद में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, शहरी प्रशासन तथा शासन से संबंधित जिम्मेदारियां संभालीं।
भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश
सुखबीर सिंह संधू वर्ष 1988 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं और उन्हें उत्तराखंड कैडर आवंटित किया गया था। भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश के बाद उन्होंने राज्य प्रशासन के विभिन्न विभागों और जिलों में कार्य किया।
उन्होंने जिला प्रशासन से लेकर राज्य और केंद्र सरकार के वरिष्ठ स्तर तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। वे हरिद्वार, गौतम बुद्ध नगर और ऊधम सिंह नगर जैसे जिलों में जिलाधिकारी एवं कलेक्टर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
जिला प्रशासन के दौरान उन्हें कानून-व्यवस्था, विकास योजनाओं, राजस्व प्रशासन और स्थानीय शासन से जुड़े कार्यों का अनुभव प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार और केंद्र सरकार में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर काम किया।
प्रशासनिक जीवन
सुखबीर सिंह संधू ने अपने प्रशासनिक करियर में उत्तराखंड, पंजाब और उत्तर प्रदेश सरकारों में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्होंने बुनियादी ढांचा विकास, राजमार्ग, सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाओं, शहरी विकास, बिजली, उद्योग और वित्त जैसे विभागों से जुड़े कार्य संभाले।
पंजाब में प्रतिनियुक्ति के दौरान वे लुधियाना नगर निगम के आयुक्त रहे। इसके अलावा उन्होंने पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
वे पंजाब सरकार में मुख्यमंत्री के विशेष सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न विभागों में सचिव और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं।
केंद्र सरकार में उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्य किया। इस पद पर रहते हुए उनका कार्यक्षेत्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और भारतीय प्रबंधन संस्थानों सहित उच्च शिक्षा के महत्वपूर्ण संस्थानों से संबंधित रहा।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में भूमिका
सुखबीर सिंह संधू को वर्ष 2019 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उन्होंने वर्ष 2019 से 2021 तक इस पद पर कार्य किया।
एनएचएआई के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल में राजमार्ग परियोजनाओं, टोल व्यवस्था और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम हुआ। उनके कार्यकाल के दौरान फास्टैग आधारित टोल संग्रह व्यवस्था को देशभर में लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुआ।
उनके कार्यकाल के दौरान एनएचएआई में तकनीक, डिजिटल निगरानी और ड्रोन आधारित परियोजना मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया गया। सड़क परियोजनाओं से संबंधित मध्यस्थता विवादों के समाधान पर भी उनके कार्यकाल में विशेष ध्यान दिया गया।
उत्तराखंड के मुख्य सचिव
सुखबीर सिंह संधू को जुलाई 2021 में उत्तराखंड का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया। उन्होंने राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य किया और जनवरी 2024 तक इस पद पर रहे।
मुख्य सचिव के रूप में उनका कार्यकाल उत्तराखंड में प्रशासनिक सुधार, निवेश, रोजगार, बुनियादी ढांचे और विभिन्न विभागों की नीतियों से जुड़ा रहा। उनके कार्यकाल के दौरान राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की नीतियों में बदलाव और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर काम किया गया।
उत्तराखंड के मुख्य सचिव के रूप में उन्होंने राज्य सरकार और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। राज्य के प्रशासनिक ढांचे में मुख्य सचिव का पद सर्वोच्च नौकरशाही पदों में से एक होता है और इस भूमिका में उन्होंने विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की निगरानी की।
लोकपाल के सचिव
उत्तराखंड के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्ति के बाद सुखबीर सिंह संधू को भारत के लोकपाल के सचिव के रूप में नियुक्त किया गया। उन्होंने फरवरी 2024 में इस पद की जिम्मेदारी संभाली।
हालांकि लोकपाल के सचिव के रूप में उनका कार्यकाल बहुत लंबा नहीं रहा, क्योंकि मार्च 2024 में उन्हें भारत निर्वाचन आयोग में चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त कर दिया गया।
भारत के चुनाव आयुक्त
सुखबीर सिंह संधू ने 15 मार्च 2024 को भारत निर्वाचन आयोग के चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार ग्रहण किया। उनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की गई चयन प्रक्रिया के बाद हुई।
चुनाव आयुक्त के रूप में उनकी जिम्मेदारी देश में लोकसभा, राज्य विधानसभा और अन्य संवैधानिक चुनाव प्रक्रियाओं के संचालन से संबंधित निर्वाचन आयोग के कार्यों में भागीदारी करना है।
भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है जो देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है। चुनाव आयुक्त के रूप में संधू ने आयोग की विभिन्न बैठकों, चुनावी तैयारियों और निर्वाचन संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाई है।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई जब 2024 का लोकसभा चुनाव निकट था। इसके बाद उन्होंने देश में होने वाले विभिन्न चुनावों से संबंधित निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में हिस्सा लिया।
वर्ष 2026 में भी सुखबीर सिंह संधू भारत निर्वाचन आयोग में चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं।
सार्वजनिक प्रशासन और शहरी सुधार
सुखबीर सिंह संधू की प्रशासनिक विशेषज्ञता में शहरी प्रशासन और बुनियादी ढांचे से जुड़े विषयों को विशेष स्थान रहा है। लुधियाना नगर निगम के आयुक्त के रूप में उन्होंने शहरी प्रशासन से संबंधित जिम्मेदारियां संभालीं।
उन्होंने शहरी सुधार और नगर निकायों की प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने से जुड़े विषयों पर अध्ययन और लेखन भी किया। उन्हें अमेरिका के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल, बोस्टन में भारतीय शहरों को तनावमुक्त और अधिक प्रभावी बनाने से संबंधित विषय पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया था।
उन्होंने शहरी सुधार तथा नगर प्रबंधन एवं क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर शोध-पत्र भी प्रकाशित किए हैं।
सम्मान और उपलब्धियाँ
सुखबीर सिंह संधू को प्रशासनिक सेवाओं के दौरान उनके कार्यों के लिए सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। लुधियाना नगर निगम के आयुक्त के रूप में उनकी सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया था।
जनगणना से संबंधित सेवाओं के लिए भी उन्हें वर्ष 2001 में राष्ट्रपति पदक प्रदान किए जाने का उल्लेख मिलता है।
उनके प्रशासनिक करियर की प्रमुख उपलब्धियों में उत्तराखंड के मुख्य सचिव के रूप में कार्य करना, एनएचएआई के अध्यक्ष के रूप में देश के राजमार्ग क्षेत्र में जिम्मेदारी निभाना तथा भारत निर्वाचन आयोग के चुनाव आयुक्त के रूप में संवैधानिक संस्था में सेवा देना शामिल है।
खेल और रुचियाँ
सुखबीर सिंह संधू की रुचि खेलों में भी रही है। वे हॉकी खेल चुके हैं। इसके अलावा उन्हें ट्रेकिंग और पर्वतारोहण में रुचि है।
उन्होंने उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित लगभग 22,000 फीट ऊंची ब्लैक पीक पर पर्वतारोहण किया है। पर्वतारोहण और साहसिक गतिविधियों में उनकी रुचि उनके व्यक्तिगत जीवन के उल्लेखनीय पक्षों में शामिल है।
व्यक्तित्व और विचार
सुखबीर सिंह संधू की पहचान एक ऐसे वरिष्ठ प्रशासक के रूप में रही है जिन्होंने जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार, केंद्र सरकार, बुनियादी ढांचा क्षेत्र और संवैधानिक संस्था तक विभिन्न स्तरों पर काम किया।
उनके प्रशासनिक करियर में बुनियादी ढांचे और शहरी विकास के साथ-साथ शिक्षा और शासन सुधार जैसे विषय भी महत्वपूर्ण रहे हैं। उन्होंने विभिन्न सरकारों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ काम करते हुए अपनी सेवाएं दीं।
उनका सार्वजनिक जीवन मुख्य रूप से प्रशासनिक जिम्मेदारियों और संस्थागत कार्यों पर केंद्रित रहा है। चुनाव आयुक्त के रूप में उनकी भूमिका राजनीतिक दलों से अलग एक संवैधानिक जिम्मेदारी के रूप में है।
निष्कर्ष
सुखबीर सिंह संधू भारत के वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने प्रशासनिक सेवा में तीन दशक से अधिक समय तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। 1988 बैच के उत्तराखंड कैडर के अधिकारी के रूप में उन्होंने जिला प्रशासन, राज्य सरकार और केंद्र सरकार में कई जिम्मेदारियां संभालीं।
वे लुधियाना नगर निगम के आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग में अतिरिक्त सचिव, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष और उत्तराखंड के मुख्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। इसके बाद उन्होंने भारत के लोकपाल के सचिव के रूप में भी सेवा दी।
15 मार्च 2024 को उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग के चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार ग्रहण किया। वर्तमान में वे देश की संवैधानिक चुनाव व्यवस्था में चुनाव आयुक्त के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
उनका प्रशासनिक जीवन चिकित्सा शिक्षा से शुरू होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा, बुनियादी ढांचा प्रशासन, उच्च शिक्षा, राज्य प्रशासन और अंततः भारत निर्वाचन आयोग तक पहुंचा। प्रशासनिक अनुभव और विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने के कारण सुखबीर सिंह संधू का सार्वजनिक जीवन भारतीय नौकरशाही और चुनाव प्रशासन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है।
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ज्ञानेश कुमार विवेक जोशी राजीव कुमार अरुण गोयल ओम प्रकाश रावत