मोरारजी देसाई का जीवन परिचय | Morarji Desai Biography
मोरारजी देसाई (Morarji Desai) भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, वरिष्ठ राजनेता और भारत के चौथे प्रधानमंत्री थे। वे भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने तथा जनता पार्टी सरकार के नेतृत्वकर्ता रहे। उनकी पहचान ईमानदार, अनुशासित और सिद्धांतवादी राजनेता के रूप में की जाती है।
मोरारजी रणछोड़जी देसाई
| जन्म | 29 फरवरी 1896 |
|---|---|
| जन्म स्थान | भदेली, वलसाड, गुजरात, भारत |
| निवास | नई दिल्ली, भारत |
| शिक्षा | विल्सन कॉलेज, मुंबई |
| शैक्षिक योग्यता | स्नातक |
| व्यवसाय | राजनेता, स्वतंत्रता सेनानी |
| पिता | रणछोड़जी देसाई |
| माता | वाजीबेन देसाई |
| पति/पत्नी | गुजराबेन देसाई |
| बच्चे | 5 |
परिचय
मोरारजी देसाई भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत के शासन तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वे बॉम्बे राज्य के मुख्यमंत्री, भारत के वित्त मंत्री, उपप्रधानमंत्री तथा प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। आपातकाल के बाद हुए 1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी की विजय के बाद वे भारत के प्रधानमंत्री बने।
जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार
मोरारजी देसाई का जन्म 29 फरवरी 1896 को गुजरात के वलसाड जिले के भदेली गाँव में हुआ था।
उनके पिता रणछोड़जी देसाई एक शिक्षक थे और माता का नाम वाजीबेन देसाई था। उनका पालन-पोषण एक अनुशासित और शिक्षित परिवार में हुआ।
वर्ष 1911 में उनका विवाह गुजराबेन देसाई से हुआ। उनके परिवार में कई संतानें थीं और उनका जीवन सादगी तथा पारंपरिक मूल्यों पर आधारित था।
शिक्षा
मोरारजी देसाई ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गुजरात में प्राप्त की।
इसके बाद उन्होंने मुंबई के विल्सन कॉलेज में अध्ययन किया। शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने सरकारी सेवा में प्रवेश किया।
छात्र जीवन से ही उनमें नेतृत्व क्षमता और सार्वजनिक जीवन के प्रति रुचि दिखाई देने लगी थी।
प्रारंभिक प्रशासनिक जीवन
मोरारजी देसाई ने ब्रिटिश शासनकाल में बॉम्बे प्रेसीडेंसी की प्रशासनिक सेवा में कार्य किया।
उन्होंने कई वर्षों तक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य किया, लेकिन बाद में स्वतंत्रता आंदोलन से प्रभावित होकर सरकारी नौकरी छोड़ दी और राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय हो गए।
स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका
मोरारजी देसाई भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े और महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया।
उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन सहित विभिन्न राष्ट्रीय अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।
उनकी पहचान एक समर्पित राष्ट्रवादी नेता के रूप में स्थापित हुई।
राजनीतिक जीवन
स्वतंत्रता के बाद मोरारजी देसाई भारतीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।
वे बॉम्बे राज्य सरकार में विभिन्न पदों पर रहे और बाद में राज्य के मुख्यमंत्री बने। प्रशासनिक दक्षता और वित्तीय अनुशासन के कारण उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली।
बॉम्बे राज्य के मुख्यमंत्री
वर्ष 1952 में मोरारजी देसाई संयुक्त बॉम्बे राज्य के मुख्यमंत्री बने।
मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासनिक सुधार, वित्तीय अनुशासन और विकास योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया। उनका कार्यकाल प्रभावशाली माना जाता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री
मोरारजी देसाई ने भारत सरकार में वित्त मंत्री के रूप में भी कार्य किया।
उन्होंने वित्तीय अनुशासन, कर सुधार और आर्थिक स्थिरता पर बल दिया। वे देश की आर्थिक नीतियों को सुदृढ़ बनाने वाले प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।
उपप्रधानमंत्री
वर्ष 1967 में मोरारजी देसाई भारत के उपप्रधानमंत्री बने।
उन्होंने इस पद पर रहते हुए आर्थिक और प्रशासनिक विषयों पर महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में शामिल थे।
आपातकाल और जनता पार्टी
वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का मोरारजी देसाई ने विरोध किया।
आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया। आपातकाल समाप्त होने के बाद विभिन्न विपक्षी दलों ने मिलकर जनता पार्टी का गठन किया, जिसमें मोरारजी देसाई प्रमुख नेताओं में शामिल थे।
भारत के प्रधानमंत्री
वर्ष 1977 के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी ने ऐतिहासिक विजय प्राप्त की।
24 मार्च 1977 को मोरारजी देसाई भारत के प्रधानमंत्री बने। वे स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से संबंधित नहीं थे।
प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, नागरिक स्वतंत्रताओं की पुनर्स्थापना और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया।
प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल
मोरारजी देसाई के नेतृत्व में आपातकाल के दौरान लागू कई नीतियों की समीक्षा की गई।
उनकी सरकार ने प्रेस की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए अनेक कदम उठाए।
हालाँकि जनता पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों के कारण उनकी सरकार का कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा रहा।
इस्तीफा
वर्ष 1979 में जनता पार्टी के भीतर राजनीतिक मतभेद बढ़ गए।
इसके परिणामस्वरूप मोरारजी देसाई ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और जनता पार्टी सरकार का अंत हो गया।
सम्मान और पुरस्कार
मोरारजी देसाई को सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए।
वर्ष 1991 में भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया।
उन्हें पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-पाकिस्तान भी प्रदान किया गया, जो किसी भारतीय नेता को मिलने वाले दुर्लभ सम्मानों में से एक है।
निधन
10 अप्रैल 1995 को मुंबई में मोरारजी देसाई का निधन हुआ।
उनका जीवन भारतीय राजनीति में सादगी, ईमानदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का उदाहरण माना जाता है।
उपलब्धियाँ और प्रभाव
- भारत के चौथे प्रधानमंत्री रहे
- स्वतंत्र भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री
- भारत के उपप्रधानमंत्री रहे
- भारत के वित्त मंत्री रहे
- बॉम्बे राज्य के मुख्यमंत्री रहे
- स्वतंत्रता सेनानी
- भारत रत्न से सम्मानित
- निशान-ए-पाकिस्तान सम्मान प्राप्त करने वाले भारतीय नेताओं में शामिल
व्यक्तित्व और विचार
मोरारजी देसाई को अनुशासित, ईमानदार और सिद्धांतवादी नेता के रूप में जाना जाता था।
वे नैतिक राजनीति, वित्तीय अनुशासन, लोकतंत्र और पारदर्शिता के समर्थक थे। सार्वजनिक जीवन में उनकी सादगी और ईमानदारी की व्यापक सराहना की जाती थी।
निष्कर्ष
मोरारजी देसाई भारतीय राजनीति के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक थे। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर प्रधानमंत्री पद तक उनका सार्वजनिक जीवन राष्ट्रसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा।
भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने भारतीय लोकतंत्र में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत की। उनका योगदान भारतीय राजनीतिक इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा।