एच. डी. देवगौड़ा का जीवन परिचय | H. D. Deve Gowda Biography

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हरदनहल्ली डोडेगौड़ा देवगौड़ा

जन्म 18 मई 1933
जन्म स्थान हरदनहल्ली, हासन जिला, मैसूर राज्य (वर्तमान कर्नाटक), भारत
निवास बेंगलुरु, कर्नाटक, भारत
शिक्षा एल. वी. पॉलिटेक्निक, हासन
शैक्षिक योग्यता सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा
व्यवसाय राजनेता, कृषक
पिता डोडेगौड़ा
माता देवम्मा
पति/पत्नी चेन्नम्मा
बच्चे 6


हरदनहल्ली डोडेगौड़ा देवगौड़ा (H. D. Deve Gowda), जिन्हें सामान्यतः एच. डी. देवगौड़ा के नाम से जाना जाता है, भारत के ग्यारहवें प्रधानमंत्री और कर्नाटक के प्रमुख राजनीतिक नेताओं में से एक हैं। वे 1 जून 1996 से 21 अप्रैल 1997 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। उनकी पहचान एक किसान नेता और ग्रामीण विकास समर्थक राजनेता के रूप में की जाती है।

परिचय

एच. डी. देवगौड़ा भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने राज्य स्तर की राजनीति से राष्ट्रीय नेतृत्व तक का सफर तय किया।

वे लंबे समय तक कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहे और राज्य के मुख्यमंत्री भी बने। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने गठबंधन राजनीति के दौर में देश का नेतृत्व किया। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को उन्होंने हमेशा प्राथमिकता दी।

जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार

एच. डी. देवगौड़ा का जन्म 18 मई 1933 को कर्नाटक के हासन जिले के हरदनहल्ली गाँव में हुआ था।

उनके पिता का नाम डोडेगौड़ा तथा माता का नाम देवम्मा था। उनका परिवार कृषि कार्य से जुड़ा हुआ था, जिसके कारण बचपन से ही उनका जुड़ाव ग्रामीण जीवन और किसानों की समस्याओं से रहा।

उनका विवाह चेन्नम्मा से हुआ। उनके छह बच्चे हैं। उनके पुत्र एच. डी. कुमारस्वामी बाद में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने।

शिक्षा

देवगौड़ा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कर्नाटक में प्राप्त की।

इसके बाद उन्होंने हासन के एल. वी. पॉलिटेक्निक संस्थान से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक कृषि और सामाजिक गतिविधियों में भाग लिया।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत

देवगौड़ा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत स्थानीय स्तर से की।

वर्ष 1962 में वे पहली बार कर्नाटक विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद वे लगातार राज्य राजनीति में सक्रिय रहे और किसानों, सिंचाई परियोजनाओं तथा ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे।

उनकी पहचान जमीनी स्तर के नेता के रूप में स्थापित हुई।

कर्नाटक की राजनीति में भूमिका

देवगौड़ा कई दशकों तक कर्नाटक विधानसभा के सदस्य रहे।

उन्होंने विपक्ष के नेता के रूप में भी कार्य किया और राज्य में सिंचाई, कृषि और ग्रामीण विकास के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

वे जनता दल के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए और राज्य स्तर पर मजबूत जनाधार तैयार किया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री

11 दिसंबर 1994 को एच. डी. देवगौड़ा कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने।

मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं, ग्रामीण विकास और किसानों के हितों को प्राथमिकता दी। उनका कार्यकाल विकास योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों के लिए जाना जाता है।

भारत के प्रधानमंत्री

वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव के बाद किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं हुआ।

इसके बाद संयुक्त मोर्चा (United Front) गठबंधन का गठन हुआ और एच. डी. देवगौड़ा को सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया।

1 जून 1996 को उन्होंने भारत के ग्यारहवें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की।

प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल

प्रधानमंत्री के रूप में देवगौड़ा ने गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया।

उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास, बुनियादी ढाँचे और संघीय व्यवस्था को मजबूत करने पर बल दिया। उनके कार्यकाल में राज्यों और केंद्र के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।

वे आम जनता, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए जाने जाते हैं।

विदेश नीति

देवगौड़ा सरकार ने पड़ोसी देशों तथा अन्य प्रमुख राष्ट्रों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत बनाए रखने की नीति अपनाई।

उनके कार्यकाल में भारत ने आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया को जारी रखा तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया।

प्रधानमंत्री पद से हटना

वर्ष 1997 में संयुक्त मोर्चा सरकार को बाहरी समर्थन दे रही कांग्रेस पार्टी ने समर्थन वापस ले लिया।

इसके परिणामस्वरूप एच. डी. देवगौड़ा सरकार बहुमत खो बैठी और उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा।

21 अप्रैल 1997 को उनका कार्यकाल समाप्त हो गया।

प्रधानमंत्री पद के बाद

प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद भी देवगौड़ा राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे।

वे जनता दल (सेक्युलर) के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे और कई बार संसद के सदस्य निर्वाचित हुए। उन्होंने किसानों और ग्रामीण विकास के मुद्दों पर अपनी सक्रियता जारी रखी।

सम्मान और विरासत

एच. डी. देवगौड़ा को भारतीय राजनीति में एक अनुभवी किसान नेता के रूप में सम्मान प्राप्त है।

राज्य राजनीति से प्रधानमंत्री पद तक पहुँचना उनकी राजनीतिक यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है। विशेष रूप से कर्नाटक की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।

उपलब्धियाँ और प्रभाव

  • भारत के ग्यारहवें प्रधानमंत्री रहे
  • कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे
  • किसानों और ग्रामीण विकास के समर्थक नेता
  • संयुक्त मोर्चा सरकार का नेतृत्व किया
  • सिंचाई और कृषि विकास के लिए कार्य किया
  • लंबे समय तक सांसद और विधायक रहे

व्यक्तित्व और विचार

एच. डी. देवगौड़ा को सरल, विनम्र और जमीनी नेता के रूप में जाना जाता है।

वे कृषि विकास, ग्रामीण कल्याण, संघीय व्यवस्था और सामाजिक न्याय के समर्थक रहे हैं। उनकी राजनीति का केंद्र हमेशा ग्रामीण भारत और किसान समुदाय रहा।

निष्कर्ष

एच. डी. देवगौड़ा भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने किसान हितों और ग्रामीण विकास को अपनी राजनीति का आधार बनाया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। गठबंधन राजनीति के दौर में उनके नेतृत्व और प्रशासनिक अनुभव का भारतीय राजनीतिक इतिहास में विशेष स्थान है।

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