Tanot Rai Mata: Difference between revisions

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तनोट राय माता राजस्थान की प्रसिद्ध लोकदेवी हैं, जिनका मंदिर भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट '''जैसलमेर जिले के तनोट गाँव''' में स्थित है। तनोट राय माता को शक्ति स्वरूपा देवी माना जाता है और वे पश्चिमी राजस्थान तथा भाटी राजपूतों की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। लोक मान्यता के अनुसार तनोट राय माता '''आवड़ माता की सात बहनों में से एक''' मानी जाती हैं और उन्हें हिंगलाज माता और [[Karni Mata|करणी माता]] भी इन्ही ही स्वरूप माना जाता है।
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'''तनोट राय माता (Tanot Rai Mata)''' राजस्थान की प्रसिद्ध लोकदेवी हैं, जिनका मंदिर भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट '''जैसलमेर जिले के तनोट गाँव''' में स्थित है। तनोट राय माता को शक्ति स्वरूपा देवी माना जाता है और वे पश्चिमी राजस्थान तथा भाटी राजपूतों की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। लोक मान्यता के अनुसार तनोट राय माता '''आवड़ माता की सात बहनों में से एक''' मानी जाती हैं और उन्हें हिंगलाज माता और [[Karni Mata|करणी माता]] भी इन्ही ही स्वरूप माना जाता है।


तनोट माता का मंदिर भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों के लिए भी अत्यंत श्रद्धा का केंद्र है।
तनोट माता का मंदिर भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों के लिए भी अत्यंत श्रद्धा का केंद्र है।
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* रानी भटियाणी माता
* रानी भटियाणी माता
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Latest revision as of 12:45, 15 May 2026


तनोट राय माता

जन्म विक्रम संवत 808 (लोक मान्यता)
जन्म स्थान हिंगलाज, बलूचिस्तान (वर्तमान पाकिस्तान)
निवास तनोट धाम, जैसलमेर, राजस्थान, भारत
शैक्षिक योग्यता देवी स्वरूप
व्यवसाय लोक देवी, हिन्दू देवी
पिता मामड़िया चारण
माता मोडी देवी


तनोट राय माता (Tanot Rai Mata) राजस्थान की प्रसिद्ध लोकदेवी हैं, जिनका मंदिर भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट जैसलमेर जिले के तनोट गाँव में स्थित है। तनोट राय माता को शक्ति स्वरूपा देवी माना जाता है और वे पश्चिमी राजस्थान तथा भाटी राजपूतों की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। लोक मान्यता के अनुसार तनोट राय माता आवड़ माता की सात बहनों में से एक मानी जाती हैं और उन्हें हिंगलाज माता और करणी माता भी इन्ही ही स्वरूप माना जाता है।

तनोट माता का मंदिर भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों के लिए भी अत्यंत श्रद्धा का केंद्र है।


तनोट राय माता का इतिहास और स्थापना

लोक परंपराओं के अनुसार तनोट राय माता का मंदिर लगभग 12वीं शताब्दी में स्थापित हुआ था। माना जाता है कि भाटी राजवंश के शासक राव तनुजी भाटी ने इस मंदिर की स्थापना करवाई थी। मंदिर का नाम भी उनके नाम से जुड़ा माना जाता है, जिससे यह स्थान “तनोट” कहलाया।

प्राचीन समय से ही यह स्थान शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है और राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में देवी की पूजा की विशेष परंपरा रही है।


1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध से जुड़ी मान्यता

तनोट राय माता मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध घटना 1965 के भारत-पाक युद्ध की है। युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना ने तनोट क्षेत्र में हजारों बम गिराए, जिनमें से कई बम मंदिर परिसर में भी गिरे, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से वे फटे नहीं।

इस घटना को देवी की कृपा और चमत्कार के रूप में देखा गया। इसके बाद भारतीय सेना ने मंदिर की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली और आज भी सीमा सुरक्षा बल (BSF) इस मंदिर का प्रबंधन करता है।

1971 के युद्ध के दौरान भी सैनिकों के बीच माता के प्रति गहरी श्रद्धा बनी रही।


तनोट राय माता मंदिर का धार्मिक महत्व

तनोट राय माता मंदिर राजस्थान के प्रमुख शक्ति तीर्थों में से एक है। यहाँ देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। विशेष रूप से नवरात्रि के समय यहाँ बड़ा धार्मिक मेला लगता है।

मंदिर परिसर में 1965 युद्ध के दौरान गिराए गए कुछ बम आज भी सुरक्षित रखे गए हैं, जिन्हें श्रद्धालु और पर्यटक देखने आते हैं।


तनोट राय माता और लोक आस्था

पश्चिमी राजस्थान की लोकसंस्कृति में तनोट राय माता को शक्ति, संरक्षण और विजय की देवी माना जाता है। सीमा क्षेत्र में तैनात सैनिक भी युद्ध से पहले माता के दर्शन करते हैं और उनकी कृपा की कामना करते हैं।

इस प्रकार तनोट राय माता का मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारत की सैन्य परंपरा और इतिहास से भी जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण स्थल बन गया है।


स्रोत

  • हिंदी विकिपीडिया — तनोट राय माता
  • राजस्थान पर्यटन विभाग
  • भारत-पाक युद्ध 1965 से संबंधित ऐतिहासिक विवरण
  • स्थानीय धार्मिक परंपराएँ

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