Nagneshi Mata Nagana

नागणेची माता राजस्थान की पूजनीय लोकदेवी हैं, जिन्हें विशेष रूप से राठौड़ वंश की कुलदेवी के रूप में माना जाता है। राजस्थान के पश्चिमी भाग में उनका अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है और अनेक श्रद्धालु उन्हें शक्ति तथा संरक्षण की देवी के रूप में पूजते हैं। उनकी आराधना केवल राजपूत समाज ही नहीं, बल्कि अन्य समुदायों द्वारा भी श्रद्धा से की जाती है।
नागणेची माता का इतिहास, प्रारंभिक स्वरूप और नाम की उत्पत्ति
ऐतिहासिक और लोकपरंपराओं के अनुसार नागणेची माता का प्राचीन नाम चक्रेश्वरी या राठेश्वरी भी बताया जाता है, जो समय के साथ नागाणा क्षेत्र से जुड़कर “नागणेची” नाम से प्रसिद्ध हुआ।
कुछ प्राचीन ख्यातों में उल्लेख मिलता है कि राठौड़ वंश के पूर्वजों से जुड़ी परंपराओं के कारण इस देवी को उनके कुल की संरक्षक देवी माना गया।
नागणेची माता का मंदिर और स्थापना से जुड़ा इतिहास
नागणेची माता का प्रमुख मंदिर राजस्थान के जोधपुर जिले के नागाणा गाँव में स्थित है, जो सदियों से श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल रहा है।
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार मारवाड़ के राठौड़ राज्य से जुड़े शासक राव धूहड़ ने इस देवी की मूर्ति स्थापित कर मंदिर का निर्माण कराया, जिससे यह स्थान राठौड़ वंश की आस्था का केंद्र बना।
मंदिर को लगभग कई शताब्दियों पुराना माना जाता है और यहाँ नवरात्रि तथा विशेष अवसरों पर बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं।
नागणेची माता और राठौड़ वंश से संबंध
नागणेची माता को राठौड़ राजवंश की कुलदेवी के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है और उनके ध्वज व प्रतीकों का संबंध भी मारवाड़ क्षेत्र की ऐतिहासिक परंपराओं से जोड़ा जाता है।
लोककथाओं में यह भी वर्णित है कि राठौड़ शासकों ने अपने राज्य विस्तार और संरक्षण के लिए इस देवी की विशेष पूजा की, जिसके कारण उनकी आराधना पूरे क्षेत्र में फैल गई।
नागणेची माता की पूजा परंपरा और धार्मिक मान्यताएँ
नागणेची माता के मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना, आरती और विशेष पर्वों पर मेले आयोजित होते हैं, जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
भक्तों का विश्वास है कि माता की कृपा से परिवार की रक्षा, संकटों से मुक्ति और समृद्धि प्राप्त होती है, इसलिए कई परिवार उन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में मानते हैं।
नागणेची माता का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
नागणेची माता की आराधना राजस्थान की लोकसंस्कृति, कुलदेवी परंपरा और क्षेत्रीय इतिहास से गहराई से जुड़ी हुई है। उनकी कथा और पूजा पद्धति लोकगीतों, पारंपरिक अनुष्ठानों और मेलों के माध्यम से आज भी जीवित है।

स्रोत
- नागणेची माता मंदिर, नागाणा
- राठौड़ों की कुलदेवी नागणेची माता का इतिहास
- पारंपरिक ख्यात एवं ऐतिहासिक संदर्भ (राव धूहड़ द्वारा स्थापना)
- नागणेची/चक्रेश्वरी नाम की उत्पत्ति व परंपराएँ