Hari Shankar Jain: Difference between revisions

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हरि शंकर जैन

जन्म 27 मई 1954
जन्म स्थान उत्तर प्रदेश, भारत
निवास नई दिल्ली, भारत
शिक्षा विधि शिक्षा
शैक्षिक योग्यता विधि स्नातक (LLB)
व्यवसाय वरिष्ठ अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट वकील
बच्चे विष्णु शंकर जैन
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हरि शंकर जैन भारत के वरिष्ठ अधिवक्ताओं में से एक हैं, जो हिंदू धार्मिक स्थलों और सनातन विरासत से जुड़े मामलों में अपनी सक्रिय भूमिका के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हैं। वे सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अनुभवी वकील हैं और लंबे समय से मंदिरों, पूजा स्थलों तथा धार्मिक अधिकारों से जुड़े मामलों में हिंदू पक्ष की पैरवी करते रहे हैं।

वे Hindu Front for Justice के अध्यक्ष रहे हैं और हिंदू महासभा से भी जुड़े रहे हैं। पिछले कई दशकों में उन्होंने राम जन्मभूमि, ज्ञानवापी, मथुरा कृष्ण जन्मभूमि, भोजशाला, कुतुब मीनार, ताजमहल और अन्य धार्मिक विवादों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उनके पुत्र विष्णु शंकर जैन भी सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हैं और पिता के साथ कई प्रमुख मामलों में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।


हरि शंकर जैन का जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार

हरि शंकर जैन का जन्म 27 मई 1954 को उत्तर प्रदेश में हुआ। उनका संबंध लखनऊ से माना जाता है।

बचपन में वे शारीरिक रूप से कमजोर बताए जाते हैं, जिसके कारण उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। उनकी माता धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों में गहरी रुचि रखती थीं और उन्होंने हरि शंकर जैन के व्यक्तित्व पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।

उन्होंने अपने कई सार्वजनिक इंटरव्यू में उल्लेख किया है कि उनकी माता हिंदू मंदिरों और भारतीय इतिहास से जुड़े विषयों पर चर्चा करती थीं, जिसने उन्हें धार्मिक स्थलों की कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित किया।

उनके पिता चाहते थे कि वे सिविल सेवा की तैयारी करें, लेकिन उन्होंने कानून और वकालत का रास्ता चुना।

उनका परिवार लंबे समय से धार्मिक और कानूनी विषयों से जुड़ा रहा है। उनके पुत्र विष्णु शंकर जैन आज भारत के चर्चित युवा अधिवक्ताओं में गिने जाते हैं।


शिक्षा

हरि शंकर जैन ने कानून की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 1976 में लखनऊ से अपनी कानूनी प्रैक्टिस शुरू की।

बाद में वे दिल्ली आ गए और सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न अदालतों में प्रैक्टिस करने लगे।

उन्होंने संवैधानिक, सिविल और धार्मिक मामलों में विशेषज्ञता विकसित की और धीरे-धीरे मंदिरों तथा धार्मिक अधिकारों से जुड़े मामलों में प्रमुख कानूनी चेहरा बन गए।


कानूनी करियर

राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ाव

हरि शंकर जैन का नाम सबसे अधिक राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़कर सामने आया।

उन्होंने वर्ष 1989 में हिंदू महासभा की ओर से राम जन्मभूमि मामले में कानूनी लड़ाई शुरू की।

1992 में बाबरी ढांचे के गिरने के बाद उन्होंने अदालत से रामलला के दर्शन की अनुमति दिलाने में भूमिका निभाई, जिसे मामले का महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।

वे लगभग तीन दशकों तक राम जन्मभूमि से जुड़े कानूनी संघर्ष का हिस्सा रहे।

ज्ञानवापी मामला

वाराणसी के ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ विवाद में हरि शंकर जैन हिंदू पक्ष के प्रमुख अधिवक्ताओं में रहे हैं।

उन्होंने पूजा अधिकार, सर्वेक्षण और ऐतिहासिक धार्मिक दावों से जुड़े मुद्दों को अदालत में उठाया। वर्ष 2022 में यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा में रहा।

कृष्ण जन्मभूमि और अन्य मामले

हरि शंकर जैन निम्नलिखित मामलों में भी सक्रिय रहे हैं:

  • मथुरा कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद
  • भोजशाला (मध्य प्रदेश) मामला
  • कुतुब मीनार परिसर विवाद
  • ताजमहल से जुड़े दावे
  • धार्मिक स्थलों पर पूजा अधिकार

इन मामलों के कारण वे भारतीय मीडिया और सार्वजनिक बहसों का प्रमुख हिस्सा बने रहे।


संघर्ष और महत्वपूर्ण घटनाएँ

हरि शंकर जैन ने लंबे समय तक सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में धार्मिक मामलों की कानूनी लड़ाई लड़ी।

उन्होंने कई बार कहा कि वे अदालतों के माध्यम से हिंदू धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक दावों को कानूनी मान्यता दिलाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने Places of Worship Act, 1991 की कुछ धाराओं को चुनौती देने वाले मामलों में भी भाग लिया।

उनकी सक्रियता को लेकर समाज में अलग-अलग मत रहे हैं। समर्थक उन्हें हिंदू धार्मिक अधिकारों की मजबूत आवाज मानते हैं, जबकि आलोचक उनकी याचिकाओं को विवादास्पद बताते रहे हैं।


उपलब्धियाँ और प्रभाव

हरि शंकर जैन की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:

  • राम जन्मभूमि मामले में लगभग 30 वर्षों तक सक्रिय कानूनी भूमिका
  • ज्ञानवापी, कृष्ण जन्मभूमि और भोजशाला जैसे मामलों में प्रमुख भागीदारी
  • हिंदू धार्मिक अधिकारों से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय पहचान
  • सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्टों में सक्रिय प्रैक्टिस
  • हिंदू धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाना

वे भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों से जुड़े सबसे चर्चित वरिष्ठ अधिवक्ताओं में गिने जाते हैं।


व्यक्तित्व और विचार

हरि शंकर जैन को स्पष्टवादी, दृढ़ और सनातन परंपराओं के प्रति समर्पित अधिवक्ता माना जाता है।

उनके विचारों में:

  • धार्मिक स्वतंत्रता
  • पूजा का अधिकार
  • सनातन सांस्कृतिक विरासत
  • ऐतिहासिक धार्मिक दावे
  • संवैधानिक प्रक्रिया

जैसे विषय प्रमुखता से दिखाई देते हैं।

वे कई सार्वजनिक मंचों पर यह कह चुके हैं कि धार्मिक विवादों का समाधान अदालतों और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।


निष्कर्ष

हरि शंकर जैन भारत के उन वरिष्ठ अधिवक्ताओं में शामिल हैं जिन्होंने धार्मिक और ऐतिहासिक मामलों में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई है।

राम जन्मभूमि से लेकर ज्ञानवापी और कृष्ण जन्मभूमि तक, उन्होंने कई ऐसे मामलों में भाग लिया जो राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने।

उनकी कानूनी यात्रा ने उन्हें भारतीय न्यायिक और सामाजिक विमर्श का एक महत्वपूर्ण चेहरा बना दिया है।


स्रोत

  1. Open The Magazine – God’s Advocates
  2. DNA India
  3. The Indian Express
  4. Times of India
  5. LiveLaw
  6. Bar & Bench
  7. सार्वजनिक इंटरव्यू और प्रेस कॉन्फ्रेंस
  8. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड
  9. आधिकारिक सोशल मीडिया प्रोफाइल्स

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