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[[File:रानी भटियाणी.png|thumb|रानी भटियाणी]]रानी भटियाणी माता पश्चिमी राजस्थान की प्रसिद्ध लोकदेवी मानी जाती हैं। उन्हें श्रद्धापूर्वक '''माजीसा''' और '''भुआसा''' के नाम से भी पुकारा जाता है। राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर तथा आसपास के क्षेत्रों में उनके प्रति गहरी आस्था देखी जाती है।
 
रानी भटियाणी माता का प्रमुख मंदिर '''जसोल (जिला बाड़मेर, राजस्थान)''' में स्थित है, जिसे “जसोल धाम” के नाम से भी जाना जाता है। यह स्थान पश्चिमी राजस्थान का एक महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थ माना जाता है, जहाँ प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
 
राजस्थान की लोकसंस्कृति में मंगणियार और ढोली समुदाय के लोकगायक उनकी महिमा का वर्णन लोकगीतों और भजनों के माध्यम से करते हैं, जिससे उनकी कथा लोकपरंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
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== रानी भटियाणी माता का जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार ==
उपलब्ध ऐतिहासिक तथा लोक स्रोतों के अनुसार रानी भटियाणी माता का वास्तविक नाम '''स्वरूप कंवर''' था।
 
लोकमान्यता के अनुसार उनका जन्म '''विक्रम संवत 1725 (लगभग 1668 ई.)''' में '''जोगीदास गाँव, जिला जैसलमेर (राजस्थान)''' में एक भाटी राजपूत परिवार में हुआ माना जाता है।
 
उनके पिता का नाम '''ठाकुर जोगराज सिंह भाटी''' बताया जाता है, जो उस क्षेत्र के प्रतिष्ठित भाटी राजपूत सरदारों में गिने जाते थे।
 
भाटी राजवंश में जन्म लेने के कारण आगे चलकर उन्हें '''भटियाणी''' कहा जाने लगा, जो भाटी वंश से संबंध को दर्शाता है।
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== रानी भटियाणी माता की शिक्षा ==
रानी भटियाणी माता की औपचारिक शिक्षा के बारे में ऐतिहासिक स्रोतों में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
 
हालाँकि उस समय राजपूत कुलों की परंपरा के अनुसार यह माना जाता है कि उन्हें बचपन से ही धार्मिक संस्कार, शौर्य परंपरा, परिवार की मर्यादा तथा सामाजिक कर्तव्यों की शिक्षा दी गई होगी।
 
राजपूत राजपरिवारों में उस काल में स्त्रियों को धर्म, संस्कृति, लोकपरंपराओं तथा गृह प्रबंधन से संबंधित ज्ञान दिया जाता था।
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== रानी भटियाणी माता का विवाह और पारिवारिक जीवन ==
युवावस्था में स्वरूप कंवर का विवाह '''जसोल (वर्तमान जिला''' '''बालोतरा)''' के राठौड़ शासक '''राव कल्याण सिंह राठौड़''' से हुआ। विवाह के बाद वे जसोल आकर रहने लगीं।
 
कुछ लोक स्रोतों में राव कल्याण सिंह की पहली पत्नी का नाम '''देवड़ी रानी''' बताया गया है।
 
लोकपरंपराओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि रानी स्वरूप कंवर के एक पुत्र का जन्म हुआ, जिनका नाम '''लाल सिंह (लाल बन्ना)''' बताया जाता है।
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== पुत्र की मृत्यु से जुड़ी लोककथा ==
लोककथाओं के अनुसार राजमहल के भीतर ईर्ष्या और पारिवारिक विवादों के कारण उनके पुत्र लाल सिंह की मृत्यु हो गई। इस घटना ने रानी स्वरूप कंवर को अत्यंत दुखी कर दिया।
 
कहा जाता है कि इस घटना के बाद उन्होंने राजमहल के जीवन से दूरी बना ली और आध्यात्मिक जीवन की ओर झुकाव बढ़ गया।
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== देवलोक गमन की कथा ==
रानी भटियाणी माता के देह त्याग से संबंधित विभिन्न लोककथाएँ प्रचलित हैं।
 
एक लोकप्रिय लोककथा के अनुसार उन्हें अपने पति की मृत्यु का समाचार मिला। बाद में यह पता चला कि युद्ध में उनके पति नहीं बल्कि उनके देवर की मृत्यु हुई थी। लेकिन पति के निधन का समाचार सत्य मानकर उन्होंने '''सती होने का निर्णय लिया'''।
 
जब वास्तविकता सामने आई तब भी उन्होंने अपना निर्णय नहीं बदला और चिता में प्रवेश कर देह त्याग दिया।
 
कुछ अन्य परंपराओं में यह भी कहा जाता है कि पुत्र की मृत्यु के गहरे दुःख के कारण उन्होंने संसार त्याग दिया।
 
इसी घटना के बाद उन्हें देवी स्वरूप मानकर पूजा जाने लगा।
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== रानी भटियाणी माता मंदिर (जसोल धाम) ==
रानी भटियाणी माता के देह त्याग के बाद उनकी स्मृति में '''जसोल (बाड़मेर)''' में एक मंदिर स्थापित किया गया। आज यह मंदिर पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है।
 
जसोल धाम में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। विशेष अवसरों पर यहाँ मेले और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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== रानी भटियाणी माता की लोक आस्था ==
रानी भटियाणी माता की पूजा कई समुदायों में प्रचलित है, जिनमें प्रमुख हैं:
 
* राजपूत
* मंगणियार
* ढोली
* चारण
* ग्रामीण समुदाय
 
भक्तजन मंदिर में '''ओढ़नी, चूड़ियाँ, कांचली तथा श्रृंगार सामग्री''' चढ़ाकर माता की पूजा करते हैं।
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== राजस्थान की लोकसंस्कृति में महत्व ==
रानी भटियाणी माता राजस्थान की लोकदेवी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी कथा त्याग, साहस और पतिव्रता धर्म के प्रतीक के रूप में देखी जाती है।
 
मंगणियार और ढोली समुदाय के लोकगायक उनकी गाथाओं को लोकगीतों के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं, जिससे उनकी कथा पीढ़ियों तक जीवित बनी हुई है।
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== स्रोत ==
 
# हिंदी विकिपीडिया — रानी भटियाणी
# पश्चिमी राजस्थान की लोकगाथाएँ और लोकसाहित्य
# जसोल रानी भटियाणी मंदिर से संबंधित स्थानीय परंपराएँ
# राजस्थान के लोकदेवता संबंधी शोध लेख
 
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== संबंधित लेख ==
 
* [[Baba Ramdev ji Maharaj|रामदेवजी महाराज]]
* [[Pabuji Rathore|पाबूजी राठौड़]]
* [[Karni Mata|करणी माता]]
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