राजेंद्र सिंह का जीवन परिचय

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राजेंद्र सिंह

जन्म 29 जनवरी 1922
जन्म स्थान बनैल, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश, भारत
निवास प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय
शैक्षिक योग्यता बी.एससी., एम.एससी. (भौतिक विज्ञान)
व्यवसाय भौतिक विज्ञानी, प्रोफेसर, सामाजिक कार्यकर्ता
पिता कुंवर बलबीर सिंह
माता ज्वाला देवी


राजेंद्र सिंह (29 जनवरी 1922 – 14 जुलाई 2003), जिन्हें रज्जू भैया के नाम से लोकप्रिय रूप से जाना जाता है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के चौथे सरसंघचालक थे। उन्होंने 1994 से 2000 तक RSS का नेतृत्व किया। इससे पहले वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे थे।

राजेंद्र सिंह का जीवन शिक्षा, विज्ञान, अध्यापन और सामाजिक-संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ा रहा। वे भौतिक विज्ञान के मेधावी विद्यार्थी रहे और आगे चलकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। 1960 के दशक में उन्होंने विश्वविद्यालय की नौकरी छोड़कर RSS के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में अपना जीवन संगठन को समर्पित कर दिया।

जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार

राजेंद्र सिंह का जन्म 29 जनवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के बनैल गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम कुंवर बलबीर सिंह और माता का नाम ज्वाला देवी था। उनके पिता उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में इंजीनियर थे और बाद में मुख्य अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए।

उनके पिता की नौकरी के कारण परिवार को अलग-अलग स्थानों पर रहना पड़ा। इसी कारण राजेंद्र सिंह की प्रारंभिक शिक्षा भी विभिन्न स्थानों पर हुई।

शिक्षा

राजेंद्र सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल में प्राप्त की और बाद में उन्नाव से मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त की।

उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान में बी.एससी. और एम.एससी. की डिग्री प्राप्त की। एम.एससी. के दौरान वे विश्वविद्यालय के अत्यंत मेधावी विद्यार्थियों में शामिल रहे। RSS के आधिकारिक स्रोत के अनुसार, एम.एससी. परीक्षा में प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी सर सी. वी. रमन उनके परीक्षक रहे और उन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचाना तथा उन्नत परमाणु भौतिकी अनुसंधान के लिए फेलोशिप की पेशकश भी की।

वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक जीवन

उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद राजेंद्र सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग से जुड़े। उन्होंने विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान का अध्यापन किया और आगे चलकर विभागाध्यक्ष के पद पर भी कार्य किया। वे विशेष रूप से स्पेक्ट्रोस्कोपी तथा परमाणु भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में रुचि रखते थे।

वे अपने सरल और स्पष्ट अध्यापन के लिए विद्यार्थियों के बीच लोकप्रिय थे। उनके विद्यार्थियों में बाद में सार्वजनिक जीवन में प्रमुख स्थान प्राप्त करने वाले लोग भी शामिल रहे। RSS के आधिकारिक स्रोत के अनुसार, मुरली मनोहर जोशी उनके विद्यार्थियों में शामिल थे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव

राजेंद्र सिंह का RSS से संपर्क 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के समय हुआ। इसके बाद वे संघ की गतिविधियों से लगातार जुड़ते चले गए। RSS के अनुसार, इसी अवधि से संघ उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

उन्होंने RSS में विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियाँ निभाईं। उत्तर प्रदेश में कार्य करते हुए वे धीरे-धीरे संगठन के प्रांतीय और अखिल भारतीय स्तर के दायित्वों तक पहुँचे।

पूर्णकालिक संघ कार्य

राजेंद्र सिंह ने 1966 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रमुख के पद से त्यागपत्र दे दिया और RSS के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में कार्य करने लगे। उन्होंने उत्तर प्रदेश से अपने पूर्णकालिक संघ कार्य की शुरुआत की।

विश्वविद्यालय में एक सफल अकादमिक करियर होने के बावजूद उन्होंने अपना अधिकांश समय संगठनात्मक कार्यों में लगाने का निर्णय लिया। इसके बाद वे उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संघ कार्य के विस्तार और कार्यकर्ताओं के निर्माण में सक्रिय रहे।

संगठनात्मक जीवन

राजेंद्र सिंह ने RSS में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ संभालीं। उत्तर प्रदेश में कार्य करते हुए उन्होंने प्रांत और क्षेत्र स्तर पर संगठन का काम देखा। बाद में वे RSS के सरकार्यवाह पद तक पहुँचे। RSS के आधिकारिक स्रोत के अनुसार, 1980 के दशक में उन्होंने सरकार्यवाह के रूप में महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाई।

आपातकाल के दौरान वे भूमिगत रहकर सक्रिय रहे और देश के विभिन्न हिस्सों में लोकतांत्रिक अधिकारों से संबंधित गतिविधियों में भूमिका निभाई। RSS के अनुसार, उन्होंने 1976 में दिल्ली में न्यायमूर्ति वी. एम. तारकुंडे की अध्यक्षता में आयोजित मानवाधिकार सम्मेलन के आयोजन में भी भूमिका निभाई।

RSS के चौथे सरसंघचालक

मधुकर दत्तात्रेय देवरस के स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ने के बाद 11 मार्च 1994 को राजेंद्र सिंह को RSS का चौथा सरसंघचालक बनाया गया। RSS के इतिहास में यह पहली बार था जब तत्कालीन सरसंघचालक ने अपने उत्तराधिकारी की घोषणा अपने जीवनकाल में की।

उन्होंने 1994 से 2000 तक RSS का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में संगठन ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपने संपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाया।

सामाजिक एवं ग्रामीण विकास

राजेंद्र सिंह स्वदेशी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के विचार के समर्थक थे। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया और स्वयंसेवकों को गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित किया।

1995 में उन्होंने ग्रामीण विकास के संदर्भ में गांवों को भूख, बीमारी और अशिक्षा से मुक्त करने को प्राथमिकता देने की बात कही। उनके नेतृत्व से जुड़े ग्रामीण विकास कार्यों के अंतर्गत विभिन्न गांवों में सामाजिक गतिविधियाँ संचालित की गईं।

व्यक्तित्व और विचार

राजेंद्र सिंह का व्यक्तित्व एक वैज्ञानिक, शिक्षक और संगठनकर्ता के रूप में विकसित हुआ। उनके जीवन में विज्ञान और सामाजिक संगठन दोनों का महत्वपूर्ण स्थान रहा। वे सरल भाषा में जटिल विषय समझाने वाले शिक्षक के रूप में भी जाने जाते थे।

उनके विचारों में ग्रामीण विकास, स्वदेशी, सामाजिक सेवा और संगठनात्मक कार्य प्रमुख रहे। वे लोगों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने के लिए भी जाने जाते थे। RSS के आधिकारिक स्रोत में उनके विचार के रूप में यह उल्लेख मिलता है कि प्रत्येक व्यक्ति के साथ उसकी मूलभूत अच्छाई को मानकर व्यवहार करना चाहिए।

सरसंघचालक पद से निवृत्ति

स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण राजेंद्र सिंह ने 2000 में RSS के सरसंघचालक पद से निवृत्ति ली। उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के रूप में के. एस. सुदर्शन को जिम्मेदारी सौंपी। RSS के आधिकारिक इतिहास में 10 मार्च 2000 को सुदर्शन के सरसंघचालक बनने का उल्लेख मिलता है।

राजेंद्र सिंह का सरसंघचालक के रूप में कार्यकाल लगभग छह वर्षों का रहा।

अंतिम समय और निधन

राजेंद्र सिंह का निधन 14 जुलाई 2003 को महाराष्ट्र के पुणे स्थित कौशिक आश्रम में हुआ। वे 81 वर्ष के थे।

उनके निधन के बाद RSS और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उनके जीवन और कार्यों को स्मरण किया। उनकी पहचान एक शिक्षक, वैज्ञानिक और RSS के चौथे सरसंघचालक के रूप में बनी रही।

उपलब्धियाँ और प्रभाव

  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य
  • परमाणु भौतिक विज्ञान और स्पेक्ट्रोस्कोपी में रुचि रखने वाले वैज्ञानिक एवं शिक्षक
  • RSS के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक कार्य
  • RSS के सरकार्यवाह के रूप में जिम्मेदारी
  • 1994 में RSS के चौथे सरसंघचालक बने
  • 1994 से 2000 तक RSS का नेतृत्व किया
  • ग्रामीण विकास और स्वदेशी अर्थव्यवस्था से जुड़े कार्यों को प्रोत्साहन दिया
  • सामाजिक एवं लोकतांत्रिक गतिविधियों में भागीदारी

विरासत

राजेंद्र सिंह की विरासत उनके वैज्ञानिक और शैक्षणिक जीवन के साथ-साथ RSS में उनके लंबे संगठनात्मक योगदान से जुड़ी है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उनके अध्यापन और भौतिक विज्ञान के प्रति योगदान के कारण उन्हें एक शिक्षक एवं वैज्ञानिक के रूप में भी याद किया जाता है।

प्रयागराज स्थित प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय का नाम भी उनके सम्मान में रखा गया है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उनके जीवन और योगदान का विवरण उपलब्ध है।

निष्कर्ष

राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) भारतीय सार्वजनिक जीवन में एक वैज्ञानिक, शिक्षक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चौथे सरसंघचालक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान के अध्यापक के रूप में सफल अकादमिक जीवन बिताया, लेकिन 1966 में विश्वविद्यालय की नौकरी छोड़कर RSS के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए।

1994 में उन्होंने RSS के चौथे सरसंघचालक के रूप में जिम्मेदारी संभाली और 2000 तक संगठन का नेतृत्व किया। ग्रामीण विकास, स्वदेशी और सामाजिक सेवा से जुड़े विषय उनके सार्वजनिक कार्यों के महत्वपूर्ण पक्ष रहे। 14 जुलाई 2003 को पुणे में उनका निधन हुआ।


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