अज़ीम प्रेमजी का जीवन परिचय | Azim Premji Biography
अज़ीम प्रेमजी
| जन्म | 24 जुलाई 1945 |
|---|---|
| जन्म स्थान | मुंबई, महाराष्ट्र, भारत |
| निवास | बेंगलुरु, कर्नाटक, भारत |
| शिक्षा | स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, संयुक्त राज्य अमेरिका |
| शैक्षिक योग्यता | इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (बाद में पूर्ण) |
| व्यवसाय | उद्योगपति, उद्यमी, परोपकारी |
| पिता | मोहम्मद हाशिम प्रेमजी |
| माता | गुलबानो प्रेमजी |
| पति/पत्नी | यास्मीन प्रेमजी |
| बच्चे | 2 |
अज़ीम प्रेमजी (Azim Premji) भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति, परोपकारी एवं विप्रो लिमिटेड (Wipro Limited) के पूर्व अध्यक्ष हैं। उन्हें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) उद्योग के अग्रदूतों में गिना जाता है। उनके नेतृत्व में विप्रो ने वनस्पति तेल बनाने वाली कंपनी से विकसित होकर विश्व की अग्रणी आईटी एवं परामर्श सेवा कंपनियों में स्थान प्राप्त किया। शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के कारण उन्हें भारत के सबसे बड़े परोपकारियों में भी गिना जाता है।
परिचय
अज़ीम प्रेमजी ने बहुत कम आयु में अपने पारिवारिक व्यवसाय की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने दूरदर्शी नेतृत्व, नवाचार और गुणवत्ता के आधार पर विप्रो को वैश्विक पहचान दिलाई। व्यवसाय के साथ-साथ उन्होंने शिक्षा सुधार, सामाजिक विकास और परोपकार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्हें भारतीय कॉर्पोरेट जगत के सबसे सम्मानित उद्योगपतियों में से एक माना जाता है।
जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार
अज़ीम प्रेमजी का जन्म 24 जुलाई 1945 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था।
उनके पिता मोहम्मद हाशिम प्रेमजी एक प्रसिद्ध उद्योगपति और Western India Vegetable Products Limited के संस्थापक थे। उनकी माता का नाम गुलबानो प्रेमजी था।
उनका परिवार मूल रूप से गुजरात के कच्छ क्षेत्र से संबंध रखता है।
उनका विवाह यास्मीन प्रेमजी से हुआ है। उनके दो पुत्र हैं, जिनमें रिशाद प्रेमजी प्रमुख हैं, जो वर्तमान में विप्रो के अध्यक्ष हैं।
शिक्षा
अज़ीम प्रेमजी ने प्रारंभिक शिक्षा मुंबई में प्राप्त की।
इसके बाद उन्होंने अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई प्रारंभ की।
वर्ष 1966 में उनके पिता के निधन के बाद उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़कर भारत लौटना पड़ा। कई वर्षों बाद उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की।
व्यवसायिक जीवन की शुरुआत
वर्ष 1966 में मात्र 21 वर्ष की आयु में अज़ीम प्रेमजी ने अपने पिता की कंपनी की बागडोर संभाली।
उस समय कंपनी मुख्य रूप से वनस्पति तेल और उपभोक्ता उत्पाद बनाती थी। उन्होंने कंपनी का विस्तार विभिन्न क्षेत्रों में किया और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली अपनाई।
विप्रो का विकास
अज़ीम प्रेमजी के नेतृत्व में कंपनी ने कंप्यूटर, सूचना प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर सेवाओं के क्षेत्र में प्रवेश किया।
बाद में कंपनी का नाम विप्रो लिमिटेड (Wipro Limited) रखा गया।
1980 और 1990 के दशक में विप्रो ने आईटी सेवाओं, सॉफ्टवेयर विकास, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और वैश्विक परामर्श सेवाओं में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की।
आज विप्रो विश्व की अग्रणी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों में से एक है और अनेक देशों में अपनी सेवाएँ प्रदान करती है।
नेतृत्व शैली
अज़ीम प्रेमजी अपने सादगीपूर्ण जीवन, अनुशासित कार्यशैली और नैतिक व्यावसायिक मूल्यों के लिए जाने जाते हैं।
उन्होंने हमेशा पारदर्शिता, गुणवत्ता और ग्राहकों के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
उनकी नेतृत्व शैली ने भारतीय कॉर्पोरेट जगत में उत्कृष्ट प्रबंधन का उदाहरण प्रस्तुत किया।
परोपकार और सामाजिक योगदान
अज़ीम प्रेमजी भारत के सबसे बड़े परोपकारियों में से एक हैं।
उन्होंने वर्ष 2001 में अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य भारत में सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
उन्होंने अपनी अधिकांश व्यक्तिगत संपत्ति का बड़ा हिस्सा समाजसेवा और शिक्षा के लिए दान कर दिया है।
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की स्थापना भी उनके सामाजिक योगदान का महत्वपूर्ण उदाहरण है, जहाँ शिक्षा, विकास और सार्वजनिक नीति से संबंधित उच्च शिक्षा प्रदान की जाती है।
पुरस्कार और सम्मान
अज़ीम प्रेमजी को उनके उद्योग एवं समाजसेवा के योगदान के लिए अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं।
प्रमुख सम्मान—
- पद्म भूषण (2005)
- पद्म विभूषण (2011)
- अनेक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों द्वारा मानद उपाधियाँ
- भारत और विश्व के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों की सूची में स्थान
प्रमुख उपलब्धियाँ
- विप्रो लिमिटेड के पूर्व अध्यक्ष
- भारतीय आईटी उद्योग के अग्रणी उद्योगपति
- अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के संस्थापक
- अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के संस्थापक
- भारत के सबसे बड़े परोपकारियों में शामिल
- भारतीय कॉर्पोरेट जगत के प्रतिष्ठित नेताओं में स्थान
व्यक्तित्व और सार्वजनिक छवि
अज़ीम प्रेमजी को सादगी, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक माना जाता है।
वे व्यवसायिक सफलता के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए भी विश्वभर में सम्मानित हैं।
निष्कर्ष
अज़ीम प्रेमजी भारत के सबसे प्रतिष्ठित उद्योगपतियों और परोपकारियों में से एक हैं। उन्होंने विप्रो को वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी के रूप में स्थापित किया और अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा शिक्षा एवं समाजसेवा के लिए समर्पित किया। भारतीय उद्योग, शिक्षा और सामाजिक विकास में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।