सविता पूनिया (Savita Punia) का जीवन परिचय, उम्र, शिक्षा और हॉकी करियर

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सविता पूनिया

जन्म 11 जुलाई 1990
जन्म स्थान जोड़कन, सिरसा, हरियाणा, भारत
शिक्षा महाराजा अग्रसेन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सिरसा
व्यवसाय हॉकी खिलाड़ी
पिता महेंद्र पूनिया


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सविता पूनिया भारतीय महिला हॉकी की प्रमुख गोलकीपर हैं। उन्होंने लंबे समय तक भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तानी की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोलकीपर के रूप में अपनी पहचान बनाई। हॉकी इंडिया के अनुसार उनका अंतरराष्ट्रीय पदार्पण 2009 में हुआ था। सितंबर 2026 में उन्होंने भारतीय महिला हॉकी में सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड अपने नाम किया।

सविता पूनिया को उनकी गोलकीपिंग के कारण हॉकी जगत में "द वॉल" के नाम से भी जाना जाता है। टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारतीय महिला टीम के ऐतिहासिक प्रदर्शन के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण बचाव किए और टीम को पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल तक पहुंचने में योगदान दिया। भारत उस ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहा।

उनके करियर में एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों, एशिया कप, एफआईएच प्रो लीग और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व शामिल है। उन्हें 2018 में अर्जुन पुरस्कार और 2025 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

सविता पूनिया का जन्म 11 जुलाई 1990 को हरियाणा के सिरसा जिले के जोड़कन गांव में हुआ था। उनके पिता महेंद्र पूनिया सिरसा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्ट के रूप में काम करते थे। उनके परिवार का संबंध ग्रामीण हरियाणा से रहा है।

सविता के हॉकी करियर की शुरुआत उनके दादा रणजीत सिंह पूनिया की प्रेरणा से हुई। उनके दादा ने दिल्ली में एक हॉकी मैच देखा था और इसके बाद वे चाहते थे कि परिवार की कोई सदस्य हॉकी खेले। सविता ने बचपन में हॉकी को करियर के रूप में अपनाने में विशेष रुचि नहीं दिखाई थी, लेकिन परिवार के प्रोत्साहन से उन्होंने खेल को जारी रखा।

लगभग 13 वर्ष की उम्र में सविता सिरसा के एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ने के लिए घर से बाहर गईं। शुरुआत में हिंदी माध्यम से अंग्रेजी माध्यम में अचानक बदलाव उनके लिए कठिन रहा। छात्रावास का जीवन और परिवार से दूर रहना भी उनके लिए चुनौतीपूर्ण था।

हॉकी की शुरुआत

सविता ने सिरसा के महाराजा अग्रसेन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हॉकी प्रशिक्षण शुरू किया। उनके गांव से स्कूल की दूरी काफी अधिक थी और उन्हें नियमित रूप से लंबी यात्रा करनी पड़ती थी। शुरुआती दौर में उन्हें हॉकी की बजाय घर लौटने की इच्छा अधिक होती थी, लेकिन उनके पिता और प्रशिक्षकों ने उन्हें खेल जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

उनके पिता ने उनके गोलकीपर बनने की क्षमता को पहचाना। भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल के कोच ने भी उनकी लंबाई और शारीरिक क्षमता को देखते हुए उन्हें गोलकीपर के रूप में आगे बढ़ाने की सलाह दी थी। इसके बाद गोलकीपिंग उनका मुख्य खेल क्षेत्र बन गया।

सविता को वर्ष 2007 में पहली बार राष्ट्रीय शिविर के लिए चुना गया। वर्ष 2008 में उन्हें भारतीय टीम के लिए बुलावा मिला, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के लिए उन्हें कुछ और समय इंतजार करना पड़ा। वर्ष 2009 को हॉकी इंडिया उनके अंतरराष्ट्रीय पदार्पण का वर्ष दर्ज करता है।

अंतरराष्ट्रीय हॉकी करियर

भारतीय महिला हॉकी टीम में जगह बनाने के बाद सविता पूनिया ने गोलकीपर के रूप में लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। उनकी शुरुआती महत्वपूर्ण उपलब्धियों में 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में भारत के लिए कांस्य पदक जीतना शामिल है। इसके बाद उन्होंने 2017 एशिया कप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहां भारत ने स्वर्ण पदक जीता।

2016 के रियो ओलंपिक क्वालीफिकेशन अभियान में इटली के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में उनके प्रदर्शन को भारत की ओलंपिक योग्यता के महत्वपूर्ण क्षणों में गिना जाता है। भारत ने 36 वर्ष बाद महिला हॉकी में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था।

सविता ने 2018 के एशियाई खेलों में भारतीय टीम के साथ रजत पदक जीता। इसी वर्ष उन्हें भारत सरकार ने अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।

टोक्यो ओलंपिक 2020

टोक्यो ओलंपिक 2020 सविता पूनिया के करियर की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। भारतीय महिला हॉकी टीम ने पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में जगह बनाई और प्रतियोगिता में चौथे स्थान पर रही। क्वार्टरफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सविता ने कई महत्वपूर्ण बचाव किए थे।

टोक्यो में उनके प्रदर्शन के बाद भारतीय महिला हॉकी में उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हुई। हॉकी इंडिया और अन्य स्रोतों ने उनके गोलकीपिंग प्रदर्शन को भारतीय टीम के उस ऐतिहासिक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तानी

सविता पूनिया ने 2021 से 2024 तक भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तानी की। कप्तान के रूप में उनके कार्यकाल में भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक और महत्वपूर्ण परिणाम हासिल किए।

2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीता। पेनल्टी शूटआउट में सविता के प्रदर्शन ने भारत को पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसी वर्ष भारत ने एफआईएच महिला नेशंस कप का खिताब भी जीता।

2022 के एशियाई खेलों में भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीता। एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में भी सविता भारतीय टीम का हिस्सा रहीं और 2023 तथा 2024 में भारत की स्वर्ण पदक विजेता टीमों में शामिल थीं।

गोलकीपर ऑफ द ईयर पुरस्कार

सविता पूनिया को एफआईएच महिला गोलकीपर ऑफ द ईयर का पुरस्कार लगातार तीन सत्रों में मिला। हॉकी इंडिया के अनुसार उन्होंने 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में यह पुरस्कार जीता। यह उपलब्धि भारतीय हॉकी में उनके गोलकीपिंग प्रदर्शन की महत्वपूर्ण पहचान रही।

उन्हें हॉकी इंडिया के स्तर पर भी कई पुरस्कार मिले। इनमें 2015 का हॉकी इंडिया बलजीत सिंह पुरस्कार फॉर गोलकीपर ऑफ द ईयर तथा 2021 और 2022 के हॉकी इंडिया बलबीर सिंह सीनियर पुरस्कारों में प्लेयर ऑफ द ईयर का सम्मान शामिल है।

पद्म श्री सम्मान

सविता पूनिया को वर्ष 2025 में भारत सरकार ने पद्म श्री से सम्मानित किया। राष्ट्रपति भवन से संबंधित सरकारी दस्तावेज में उन्हें भारतीय महिला राष्ट्रीय फील्ड हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और गोलकीपर के रूप में वर्णित किया गया है।

पद्म श्री के आधिकारिक विवरण में उनकी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों, 2016 ओलंपिक क्वालीफिकेशन में भूमिका, टोक्यो ओलंपिक के प्रदर्शन और 2022 राष्ट्रमंडल खेलों तथा एफआईएच नेशंस कप की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है।

सामाजिक गतिविधियाँ

सविता पूनिया खेल के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी भाग लेती रही हैं। सरकारी पद्म पुरस्कार संबंधी विवरण के अनुसार वे सिरसा जिले में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड एंबेसडर रही हैं। उन्होंने लड़कियों की शिक्षा, लैंगिक समानता और युवाओं के खेल में भाग लेने से संबंधित गतिविधियों में भी योगदान दिया है।

उनकी अपनी खेल यात्रा में ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अनुभव रहा है। इसी कारण वे विशेष रूप से हरियाणा और अन्य राज्यों की युवा खिलाड़ियों के बीच हॉकी के प्रति रुचि बढ़ाने वाली गतिविधियों से भी जुड़ी रही हैं।

संघर्ष और करियर की चुनौतियाँ

सविता पूनिया का खेल जीवन केवल अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा। शुरुआती वर्षों में उन्हें खेल के साथ आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। भारतीय एक्सप्रेस के अनुसार, 2008 से 2018 के बीच भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ियों के लिए रोजगार और आर्थिक सुरक्षा सीमित थी। सविता ने भी उस दौर में भविष्य और रोजगार को लेकर चिंता का सामना किया।

2018 में अर्जुन पुरस्कार मिलने के बाद उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण में कोचिंग से जुड़ी नौकरी के लिए आवेदन किया। इसके बाद उन्हें खेल क्षेत्र में रोजगार मिला और वे कोचिंग से भी जुड़ी रहीं।

उनके करियर में टीम के चयन और प्रदर्शन से जुड़े कठिन दौर भी आए। 2016 रियो ओलंपिक के बाद टीम के प्रदर्शन को लेकर आलोचना का सामना करने की बात उन्होंने स्वयं एक साक्षात्कार में कही थी। बाद में कोच स्योर्ड मारिजने के कार्यकाल में उन्हें फिर टीम में महत्वपूर्ण भूमिका मिली और वे उपकप्तान बनीं।

2026 में अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड

सितंबर 2026 में सविता पूनिया ने भारतीय महिला हॉकी में सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने एशियाई खेलों में वंदना कटारिया के 320 अंतरराष्ट्रीय मैचों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। 20 सितंबर को उन्होंने रिकॉर्ड की बराबरी की और 21 सितंबर 2026 को इंडोनेशिया के खिलाफ मुकाबले में 321वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेलकर नया रिकॉर्ड बनाया।

हॉकी इंडिया ने इस उपलब्धि के लिए सविता को 10 लाख रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की। इस रिकॉर्ड के साथ वे भारतीय महिला हॉकी की सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली खिलाड़ी बनीं।

उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में तीन ओलंपिक खेलों में भागीदारी, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों, विश्व कप, एशिया कप, एफआईएच नेशंस कप और एफआईएच प्रो लीग जैसी प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व शामिल रहा है।

खेल शैली

सविता पूनिया गोलकीपर के रूप में तेज प्रतिक्रिया, पेनल्टी शूटआउट में बचाव और दबाव की परिस्थितियों में गोलपोस्ट की सुरक्षा के लिए जानी जाती हैं। उनकी भूमिका केवल गोल रोकने तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई मुकाबलों में उनके बचाव ने मैच के परिणाम को प्रभावित किया।

उनके लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान भारतीय महिला हॉकी टीम में गोलकीपर के रूप में उनकी निरंतर उपस्थिति रही। इसी कारण उन्हें भारतीय महिला हॉकी की अनुभवी खिलाड़ियों में गिना जाता है।

प्रमुख उपलब्धियाँ

  • 2009 में भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया।
  • 2014 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता।
  • 2017 एशिया कप में भारत की स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा रहीं।
  • 2018 में अर्जुन पुरस्कार प्राप्त किया।
  • टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारतीय महिला टीम के चौथे स्थान तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीता।
  • 2022 में भारत को एफआईएच महिला नेशंस कप का खिताब दिलाने वाली टीम का हिस्सा रहीं।
  • 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में एफआईएच गोलकीपर ऑफ द ईयर पुरस्कार जीता।
  • 2025 में पद्म श्री से सम्मानित हुईं।
  • सितंबर 2026 में 321 अंतरराष्ट्रीय मैचों के साथ भारतीय महिला हॉकी की सर्वाधिक कैप वाली खिलाड़ी बनीं।

वर्तमान स्थिति

सितंबर 2026 तक सविता पूनिया भारतीय महिला हॉकी से जुड़ी हुई हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोलकीपर की भूमिका निभा रही हैं। हॉकी इंडिया की खिलाड़ी प्रोफाइल में उन्हें गोलकीपर के रूप में दर्ज किया गया है। 2026 के एशियाई खेलों के दौरान उन्होंने भारतीय महिला हॉकी में सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।

उनका करियर दो दशक के करीब अंतरराष्ट्रीय हॉकी, भारतीय महिला टीम की कप्तानी, ओलंपिक प्रदर्शन, एशियाई और राष्ट्रमंडल प्रतियोगिताओं के पदकों तथा व्यक्तिगत पुरस्कारों से जुड़ा रहा है। 2026 में सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैचों का रिकॉर्ड उनके लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बना।

निष्कर्ष

सविता पूनिया का जीवन ग्रामीण हरियाणा से निकलकर भारतीय महिला हॉकी के अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की कहानी है। बचपन में हॉकी को लेकर विशेष रुचि न होने के बावजूद परिवार और प्रशिक्षकों के प्रोत्साहन से उन्होंने गोलकीपर के रूप में अपना करियर बनाया। शुरुआती कठिनाइयों और आर्थिक असुरक्षा के बावजूद उन्होंने भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई और लंबे समय तक देश का प्रतिनिधित्व किया।

टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारतीय महिला टीम के ऐतिहासिक प्रदर्शन से लेकर 2022 राष्ट्रमंडल खेलों के कांस्य पदक और एफआईएच नेशंस कप के स्वर्ण पदक तक, सविता भारतीय महिला हॉकी की कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों का हिस्सा रही हैं। अर्जुन पुरस्कार और पद्म श्री जैसे राष्ट्रीय सम्मानों के साथ-साथ लगातार तीन एफआईएच गोलकीपर ऑफ द ईयर पुरस्कार उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं। सितंबर 2026 में 321 अंतरराष्ट्रीय मैचों के साथ सर्वाधिक कैप वाली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी बनना उनके करियर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

स्रोत

  • हॉकी इंडिया
  • भारतीय खेल मंत्रालय / प्रेस सूचना ब्यूरो
  • अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH)
  • The Indian Express
  • Hindustan Times
  • NDTV
  • India Today

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