सुजीत कलकल (Sujeet Kalkal) का जीवन परिचय, उम्र, शिक्षा और कुश्ती करियर




सुजीत कलकल भारत के फ्रीस्टाइल पहलवान हैं, जो 65 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हैं। हरियाणा के चरखी दादरी जिले के इमलोटा गांव से निकलकर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में पहचान बनाई है। वर्ष 2025 में उन्होंने 23 वर्ष से कम आयु की विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 65 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीता और वर्ष 2026 में वरिष्ठ एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप तथा एशियाई खेलों में इसी भार वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया।

सुजीत कलकल

जन्म 5 नवंबर 2002
जन्म स्थान इमलोटा, चरखी दादरी, हरियाणा, भारत
शैक्षिक योग्यता कक्षा 12 में 90 प्रतिशत से अधिक अंक
व्यवसाय पहलवान
पिता दयानंद कलकल


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2 अक्टूबर 2026 को जापान के नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में सुजीत कलकल ने पुरुषों की 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुडिएव को 10-9 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में वे एक समय 2-9 से पीछे थे, लेकिन मुकाबले के अंतिम चरण में लगातार अंक हासिल करते हुए उन्होंने वापसी की और भारत के लिए इस एशियाई खेल में कुश्ती का पहला स्वर्ण पदक जीता।

एशियाई खेलों के फाइनल से पहले उन्होंने जापान के पेरिस ओलंपिक 2024 के स्वर्ण पदक विजेता कोतारो कियोका को 65 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में 3-3 के स्कोर पर हराया था। मुकाबले के अंतिम क्षणों में बेहतर बचाव के आधार पर सुजीत को विजेता घोषित किया गया।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

सुजीत कलकल का जन्म 5 नवंबर 2002 को हरियाणा के चरखी दादरी जिले के इमलोटा गांव में हुआ था। उनके पिता दयानंद कलकल स्वयं राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हैं और बाद में कुश्ती प्रशिक्षण से जुड़े। पिता के कारण सुजीत का बचपन से ही कुश्ती के वातावरण से परिचय हुआ।

सुजीत ने अपने गांव के पुराने अखाड़े में कुश्ती का अभ्यास शुरू किया। शुरुआती दौर में वहां सुविधाएं सीमित थीं और उन्हें औपचारिक रूप से प्रशिक्षित कोचिंग की कमी का सामना करना पड़ा। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के साथ बातचीत में सुजीत ने बताया था कि वे शुरुआती वर्षों में जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में हार का सामना करते थे। वर्ष 2019 में राज्य स्तर पर मिली हार भी उनके शुरुआती संघर्ष का हिस्सा रही।

वर्ष 2020 तक उन्होंने इमलोटा में ही प्रशिक्षण जारी रखा। वर्ष 2021 में वे सोनीपत चले गए, जहां उन्हें अधिक अनुभवी पहलवानों के साथ अभ्यास करने और बेहतर प्रशिक्षण वातावरण मिला। उनके करियर में यह बदलाव महत्वपूर्ण साबित हुआ और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके प्रदर्शन में तेजी से सुधार आया।

शिक्षा

कुश्ती के साथ-साथ सुजीत कलकल का ध्यान पढ़ाई पर भी रहा। उन्होंने कक्षा 12 में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए थे। पढ़ाई के दौरान उनका लक्ष्य इंजीनियर बनने का था और वे उच्च शिक्षा के माध्यम से इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाने की योजना बना रहे थे।

बाद में उन्हें उच्च शिक्षा और कुश्ती में से एक रास्ता चुनना पड़ा। उन्होंने कुश्ती को अपना प्रमुख करियर बनाने का निर्णय लिया और अपने पिता के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान देना शुरू किया।

कुश्ती की शुरुआत और प्रशिक्षण

सुजीत के पिता दयानंद कलकल ने बचपन से ही उनके प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया। दयानंद राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हैं और सुजीत की तकनीकी कुश्ती विकसित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। पिता ने शुरुआत में सुजीत की ताकत बढ़ाने की बजाय मैट पर उनकी तकनीक, मूवमेंट और पैरों के इस्तेमाल पर अधिक ध्यान दिया।

इमलोटा के अखाड़े में प्रशिक्षण के दौरान सुजीत ने बुनियादी तकनीकों पर लंबे समय तक काम किया। उनके पिता के अनुसार, एक-एक मूवमेंट को स्वाभाविक बनाने के लिए कई महीनों तक अभ्यास कराया गया। इसके बाद सोनीपत में उन्हें उच्च स्तर के प्रशिक्षण साझेदार मिले, जिससे उनके खेल की गति और तकनीकी क्षमता में सुधार हुआ।

2022 में अंतरराष्ट्रीय सफलता

वर्ष 2022 सुजीत कलकल के करियर का महत्वपूर्ण वर्ष रहा। उन्होंने 65 किलोग्राम भार वर्ग में अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उन्होंने अंडर-20 एशियाई चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक हासिल किया। उसी वर्ष जुलाई में ट्यूनीशिया में आयोजित यूडब्ल्यूडब्ल्यू रैंकिंग सीरीज प्रतियोगिता में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता।

एक ही महीने में तीन अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतने से 65 किलोग्राम भार वर्ग में उनकी पहचान मजबूत हुई। उनके प्रदर्शन में तकनीकी कुश्ती और तेज आक्रमण प्रमुख विशेषताएं रहीं।

राष्ट्रीय और वरिष्ठ कुश्ती करियर

युवा स्तर पर सफलता के बाद सुजीत ने वरिष्ठ स्तर की भारतीय कुश्ती में अपनी जगह बनाने की दिशा में काम किया। 65 किलोग्राम भार वर्ग में उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और चयन मुकाबलों में भाग लिया। उन्होंने राष्ट्रीय खेलों और वरिष्ठ राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी खिताब जीते और इसी प्रदर्शन के आधार पर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय टीम में अपनी दावेदारी मजबूत की।

उनकी कुश्ती शैली में गति, तकनीक और काउंटर अटैक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके पिता और प्रशिक्षकों ने शुरुआती दौर से ही मैट पर मूवमेंट और तकनीकी नियंत्रण को प्राथमिकता दी। इसी वजह से उनका खेल पारंपरिक ताकत आधारित कुश्ती से अलग तकनीकी पहलुओं पर भी निर्भर करता है।

2024 की चुनौती

वर्ष 2024 में सुजीत कलकल को ओलंपिक क्वालीफिकेशन की दौड़ में एक कठिन परिस्थिति का सामना करना पड़ा। वे दुबई में बाढ़ के कारण उड़ानों में आई बाधाओं के चलते एशियाई ओलंपिक क्वालीफायर के लिए निर्धारित समय पर बिश्केक नहीं पहुंच सके। वे वहां तब पहुंचे जब वजन जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, जिसके कारण वे प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सके।

इस झटके के बाद उन्होंने अपना प्रशिक्षण जारी रखा। वर्ष 2024 में उन्होंने 23 वर्ष से कम आयु की विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 70 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक भी जीता। यह उनके लिए एक अलग भार वर्ग में अंतरराष्ट्रीय पदक था।

2025 में विश्व चैंपियन बने

वर्ष 2025 में सुजीत कलकल ने 65 किलोग्राम भार वर्ग में 23 वर्ष से कम आयु की विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की बड़ी उपलब्धि हासिल की। यह प्रतियोगिता सर्बिया के नोवी साद में आयोजित हुई थी। फाइनल में उन्होंने उज्बेकिस्तान के उमिदजोन जालोलोव को 10-0 से हराया। मुकाबला तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर समाप्त हुआ।

इससे पहले उन्होंने प्रतियोगिता के शुरुआती मुकाबलों में मोल्दोवा के फियोदोर चेवदारी और पोलैंड के डोमिनिक जाकुब को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराया। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने उज्बेकिस्तान के बशीर मागोमेदोव को 4-2 से हराया और सेमीफाइनल में जापान के युतो निशिउची को 3-2 से पराजित किया।

यह उनका पहला विश्व खिताब था। इससे पहले वे 2022 और 2025 में अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक तथा 2022 में अंडर-20 एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुके थे।

2026 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप

वर्ष 2026 में सुजीत कलकल ने 65 किलोग्राम भार वर्ग में एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता। इस जीत के बाद वे इस भार वर्ग में एशिया के शीर्ष पहलवानों में शामिल हुए और यूडब्ल्यूडब्ल्यू की विश्व रैंकिंग में नंबर एक स्थान तक पहुंचे।

एशियाई चैंपियनशिप के दौरान उन्होंने ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुडिएव को सेमीफाइनल में 7-2 से हराया था। यही पहलवान बाद में 2026 एशियाई खेलों के फाइनल में उनके सामने आया।

2026 के शुरुआती महीनों में सुजीत ने अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी स्वर्ण पदक जीते। उनका प्रदर्शन पूरे वर्ष लगातार रहा और एशियाई खेलों से पहले वे 65 किलोग्राम वर्ग के प्रमुख भारतीय पहलवानों में शामिल हो चुके थे।

2026 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक

2 अक्टूबर 2026 को नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में सुजीत कलकल ने पुरुषों की 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में उनका सामना ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुडिएव से हुआ। कुडिएव के खिलाफ वे एक समय 2-9 से पीछे चल रहे थे, लेकिन अंतिम चरण में उन्होंने लगातार अंक हासिल कर मुकाबला 10-9 से अपने पक्ष में कर लिया।

फाइनल से पहले सेमीफाइनल में सुजीत का मुकाबला जापान के कोतारो कियोका से हुआ। दोनों पहलवानों का स्कोर 3-3 रहा, लेकिन अंतिम क्षणों में सुजीत के बेहतर बचाव के आधार पर उन्हें विजेता घोषित किया गया। कियोका पेरिस 2024 ओलंपिक के 65 किलोग्राम वर्ग के स्वर्ण पदक विजेता हैं।

एशियाई खेलों का यह स्वर्ण पदक सुजीत के वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय करियर की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हो गया। 65 किलोग्राम वर्ग में इससे पहले भारत के लिए योगेश्वर दत्त ने 2014 और बजरंग पूनिया ने 2018 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था।

कुश्ती शैली

सुजीत कलकल की कुश्ती में तकनीक, तेज मैट मूवमेंट और काउंटर अटैक प्रमुख तत्व हैं। उनके पिता दयानंद कलकल ने बचपन से ही उन्हें तकनीकी कुश्ती पर ध्यान देने के लिए प्रशिक्षित किया। सुजीत ने भी अपने खेल के बारे में कहा है कि उनकी शैली अंतरराष्ट्रीय पहलवानों की तकनीकी शैली के अधिक करीब है और वे अपनी ताकत तथा सहनशक्ति में लगातार सुधार करते रहे हैं।

उनके प्रशिक्षण में पैरों की गति और बचाव को विशेष महत्व दिया गया। उनके पिता के अनुसार फ्रीस्टाइल कुश्ती में प्रतिद्वंद्वी के पैरों पर आक्रमण और अपने पैरों का बचाव महत्वपूर्ण तकनीकी पक्ष हैं। इसी आधार पर सुजीत की कुश्ती में गति और सही समय पर काउंटर अटैक की भूमिका दिखाई देती है।

प्रमुख उपलब्धियाँ

  • 2022 में 65 किलोग्राम वर्ग में अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता।
  • 2022 में अंडर-20 एशियाई चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता।
  • 2022 में ट्यूनीशिया की यूडब्ल्यूडब्ल्यू रैंकिंग सीरीज में स्वर्ण पदक जीता।
  • 2024 में 70 किलोग्राम वर्ग में अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का कांस्य पदक जीता।
  • 2025 में 65 किलोग्राम वर्ग में अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता।
  • 2026 में 65 किलोग्राम वर्ग में एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता।
  • 2 अक्टूबर 2026 को एशियाई खेलों में 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती का स्वर्ण पदक जीता।

वर्तमान स्थिति

अक्टूबर 2026 तक सुजीत कलकल भारतीय कुश्ती के 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में सक्रिय हैं। वर्ष 2026 में एशियाई चैंपियनशिप और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के साथ उनका अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन लगातार चर्चा में रहा है। एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने से पहले वे 65 किलोग्राम वर्ग में यूडब्ल्यूडब्ल्यू की शीर्ष रैंकिंग तक भी पहुंचे थे।

उनका करियर इमलोटा के स्थानीय अखाड़े से शुरू होकर सोनीपत के उच्च स्तरीय प्रशिक्षण वातावरण, युवा एशियाई और विश्व प्रतियोगिताओं में सफलता तथा वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय कुश्ती के बड़े खिताबों तक पहुंचा है। 2026 के एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक उनके अब तक के करियर की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है।

निष्कर्ष

सुजीत कलकल का कुश्ती करियर हरियाणा के इमलोटा गांव के अखाड़े से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्वर्ण पदकों तक पहुंचा है। उनके पिता दयानंद कलकल ने बचपन से उनके प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पढ़ाई में भी अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्होंने इंजीनियरिंग की दिशा में आगे बढ़ने के बजाय कुश्ती को अपना करियर चुना। वर्ष 2021 में सोनीपत जाने के बाद उन्हें अधिक अनुभवी पहलवानों के साथ प्रशिक्षण का अवसर मिला और इसके बाद उनके अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन में तेजी आई।

2025 में अंडर-23 विश्व चैंपियन बनने के बाद उन्होंने 2026 में वरिष्ठ एशियाई चैंपियनशिप और एशियाई खेलों में 65 किलोग्राम वर्ग के स्वर्ण पदक जीतकर अपने करियर को आगे बढ़ाया। एशियाई खेलों के फाइनल में 2-9 से पिछड़ने के बाद 10-9 की वापसी ने इस प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन को विशेष रूप से उल्लेखनीय बनाया।

स्रोत

  • United World Wrestling (UWW)
  • The Indian Express
  • Hindustan Times
  • Business Standard
  • The Economic Times
  • Times of India
  • Amar Ujala

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