रमिला खड़िया (Ramila Khadiya) का जीवन परिचय, उम्र, पत्नी, शिक्षा, राजनीतिक जीवन




रमिला खड़िया (Ramila Khadiya) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की राजनेता तथा राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। वे कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र से लगातार दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुई हैं। राजस्थान विधानसभा के वर्तमान रिकॉर्ड में उनका नाम कुशलगढ़ (ST) से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की विधायक के रूप में दर्ज है।

रमिला खड़िया

जन्म 2 अप्रैल 1974
जन्म स्थान हिम्मतपुरा, कुशलगढ़, बांसवाड़ा, राजस्थान, भारत
निवास पोटलिया, कलिंजरा, कुशलगढ़, बांसवाड़ा, राजस्थान
शिक्षा माध्यमिक
शैक्षिक योग्यता साक्षर
व्यवसाय कृषक, व्यवसायी, राजनेता
पिता नरसिंग कटारा
माता जेम देवी
पति/पत्नी स्वर्गीय हूरतिंग खड़िया
बच्चे 1 पुत्र एवं 1 पुत्री

Ramila Khadiya Biography, Ramila Khadiya MLA, Ramila Khadiya INC, Kushalgarh MLA और Kushalgarh Assembly Constituency उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े प्रमुख English SEO keywords हैं। कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है और बांसवाड़ा जिले में स्थित है।

रमिला खड़िया ने वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर पहली बार राजस्थान विधानसभा में प्रवेश किया था। वर्ष 2023 में कांग्रेस ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया और उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर कुशलगढ़ से दोबारा जीत दर्ज की।

जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार

रमिला खड़िया का जन्म 2 अप्रैल 1974 को राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ क्षेत्र के हिम्मतपुरा गांव में हुआ। उनके पिता का नाम नरसिंग कटारा और माता का नाम जेम देवी है। उनका स्थायी निवास पोटलिया, पोस्ट कलिंजरा, तहसील कुशलगढ़, जिला बांसवाड़ा में दर्ज है।

उनका संबंध बांसवाड़ा के ग्रामीण और आदिवासी परिवेश से रहा है। कुशलगढ़ क्षेत्र दक्षिणी राजस्थान के महत्वपूर्ण आदिवासी क्षेत्रों में शामिल है और विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। रमिला खड़िया का सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन इसी क्षेत्र से लंबे समय से जुड़ा रहा है।

रमिला खड़िया का विवाह स्वर्गीय हूरतिंग खड़िया से हुआ था। उपलब्ध सार्वजनिक विवरण के अनुसार उनके एक पुत्र और एक पुत्री हैं। उनके पति हूरतिंग खड़िया भी राजनीति से जुड़े रहे थे और कुशलगढ़ क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे थे।

अप्रैल 2023 में उनके भाई बलवान सिंह की सड़क दुर्घटना में मृत्यु की घटना भी सार्वजनिक रूप से सामने आई थी।

शिक्षा

रमिला खड़िया की शिक्षा माध्यमिक स्तर तक हुई है। उपलब्ध सार्वजनिक विवरण में उनकी शैक्षणिक योग्यता माध्यमिक दर्ज की गई है, जबकि वर्ष 2023 के चुनावी हलफनामे में उनकी शिक्षा संबंधी श्रेणी साक्षर दर्ज की गई थी।

उनकी शिक्षा के बाद उनका जीवन कृषि, व्यवसाय और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा रहा। चुनावी हलफनामे में कृषि तथा गैस एजेंसी से संबंधित व्यवसाय के साथ ब्याज, किराये और विधायक के रूप में प्राप्त आय का भी उल्लेख किया गया है।

प्रारंभिक जीवन

रमिला खड़िया का प्रारंभिक जीवन कुशलगढ़ क्षेत्र के ग्रामीण और आदिवासी वातावरण में बीता। उन्होंने सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई और आदिवासी महिलाओं के उत्थान के लिए संगठन बनाकर कार्य करने की जानकारी उपलब्ध सार्वजनिक विवरण में दर्ज है। उनकी रुचियों में आदिवासी लोकगीत और हॉकी भी शामिल बताए गए हैं।

राजनीति में सक्रिय होने से पहले वे स्थानीय स्तर पर सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी रहीं। वर्ष 2003 से 2008 तक वे पंचायत समिति पोटलिया-भागपुरा की सदस्य रहीं। इसके बाद वर्ष 2005 से 2016 तक उन्होंने पंचायत समिति कुशलगढ़ की प्रधान के रूप में भी कार्य किया।

स्थानीय निकायों में लंबे समय तक कार्य करने के कारण उन्हें कुशलगढ़ क्षेत्र के ग्रामीण प्रशासन और स्थानीय समस्याओं का अनुभव मिला। यही अनुभव आगे चलकर उनकी विधानसभा राजनीति का आधार बना।

राजनीतिक जीवन

रमिला खड़िया का राजनीतिक जीवन स्थानीय निकायों से आगे बढ़कर राजस्थान विधानसभा तक पहुंचा। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के भीमा भाई को हराकर जीत दर्ज की।

वर्ष 2018 में रमिला खड़िया को 94,344 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी भीमा भाई को 75,394 मत प्राप्त हुए। उन्होंने 18,950 मतों के अंतर से चुनाव जीता। इस जीत के साथ वे 15वीं राजस्थान विधानसभा की सदस्य बनीं।

निर्दलीय विधायक बनने के बाद भी उन्होंने कांग्रेस सरकार का समर्थन किया। वर्ष 2020 में सचिन पायलट के नेतृत्व वाले राजनीतिक संकट के दौरान रमिला खड़िया ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति समर्थन जताया। इस राजनीतिक घटनाक्रम के कारण उनका नाम राजस्थान की राजनीति में विशेष रूप से चर्चा में आया।

वर्ष 2023 में कांग्रेस ने उन्हें कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र से अपना प्रत्याशी बनाया। इस प्रकार वे निर्दलीय विधायक के रूप में कार्य करने के बाद औपचारिक रूप से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव मैदान में उतरीं।

2023 राजस्थान विधानसभा चुनाव

वर्ष 2023 का राजस्थान विधानसभा चुनाव रमिला खड़िया के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण चुनाव रहा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने उन्हें कुशलगढ़ (ST) विधानसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया। आधिकारिक चुनाव परिणाम के अनुसार रमिला खड़िया को कुल 97,480 मत प्राप्त हुए और वे विजयी रहीं।

भारतीय जनता पार्टी के भीमा भाई को 87,676 मत मिले। इस प्रकार रमिला खड़िया ने भाजपा प्रत्याशी को 9,804 मतों के अंतर से पराजित किया। भारत आदिवासी पार्टी के राजेंद्र को 33,758 मत मिले।

कुशलगढ़ चुनाव में रमिला खड़िया को कुल मतों का लगभग 41.48 प्रतिशत प्राप्त हुआ। आधिकारिक परिणाम में उन्हें निर्वाचित उम्मीदवार घोषित किया गया और 3 दिसंबर 2023 को उनका निर्वाचन प्रमाणित हुआ।

वर्ष 2023 की जीत के बाद वे 16वीं राजस्थान विधानसभा की सदस्य बनीं। इस प्रकार वे कुशलगढ़ से लगातार दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुईं और कांग्रेस की विधायक के रूप में विधानसभा में पहुंचीं। राजस्थान विधानसभा के वर्तमान रिकॉर्ड में उनकी सदस्यता 15वीं और 16वीं दोनों विधानसभाओं में दर्ज है।

विधायक के रूप में कार्य

Kushalgarh MLA के रूप में रमिला खड़िया बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनका वर्तमान विधानसभा कार्यकाल 3 दिसंबर 2023 से शुरू हुआ और वे वर्तमान में पद पर हैं।

विधानसभा के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 16वीं विधानसभा के शुरुआती कार्यकाल में उनकी उपस्थिति लगभग 96.3 प्रतिशत रही। उन्होंने विधानसभा में प्रश्न पूछने और बहस में भाग लेने के माध्यम से अपनी विधायी भूमिका निभाई है।

फरवरी 2026 में विधानसभा में उनके एक संबोधन में टीएसपी क्षेत्र के बजट, आदिवासी छात्रावासों की स्थिति, मुआवजे, महिला सुरक्षा, बिजली-पानी और भूमि अधिकार जैसे मुद्दों को उठाए जाने की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आई।

कुशलगढ़ क्षेत्र के विधायक के रूप में उनका कार्यक्षेत्र बांसवाड़ा जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र से संबंधित स्थानीय समस्याओं और विकास से जुड़े विषयों तक फैला हुआ है।

पंचायत और स्थानीय राजनीति

विधानसभा की राजनीति में आने से पहले रमिला खड़िया स्थानीय निकायों में सक्रिय थीं। वर्ष 2003 से 2008 तक वे पंचायत समिति पोटलिया-भागपुरा की सदस्य रहीं। इसके बाद वर्ष 2005 से 2016 तक उन्होंने पंचायत समिति कुशलगढ़ की प्रधान के रूप में कार्य किया।

स्थानीय निकाय में कार्य करने के दौरान उन्हें ग्रामीण विकास, पंचायत प्रशासन और स्थानीय स्तर की समस्याओं से सीधे जुड़ने का अवसर मिला। बाद में विधानसभा चुनावों में उनकी राजनीतिक पहचान इसी स्थानीय आधार के कारण मजबूत हुई।

उनकी राजनीतिक यात्रा में पंचायत स्तर से विधानसभा तक पहुंचने का क्रम दिखाई देता है। स्थानीय निकायों में सक्रियता के बाद वर्ष 2018 में वे पहली बार विधायक बनीं और वर्ष 2023 में दोबारा विधानसभा पहुंचीं।

कांग्रेस के साथ राजनीतिक संबंध

रमिला खड़िया का कांग्रेस से पुराना राजनीतिक संबंध रहा है। वर्ष 2018 में कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने के कारण उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन किया।

वर्ष 2023 में कांग्रेस ने उन्हें फिर से पार्टी का उम्मीदवार बनाया। कांग्रेस की पहली सूची में कुशलगढ़ से रमिला खड़िया को उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा हुई। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर विधानसभा चुनाव लड़ा और भाजपा प्रत्याशी को पराजित किया।

इस जीत के बाद उनकी राजनीतिक पहचान Ramila Khadiya INC और Kushalgarh MLA के रूप में स्थापित हुई। वर्तमान राजस्थान विधानसभा रिकॉर्ड में भी उन्हें INC के सदस्य के रूप में दर्ज किया गया है।

विवाद और सार्वजनिक चर्चा

रमिला खड़िया का राजनीतिक जीवन कई अवसरों पर सार्वजनिक चर्चा में रहा है। वर्ष 2020 के राजस्थान राजनीतिक संकट के दौरान उनके द्वारा अशोक गहलोत सरकार को समर्थन दिए जाने को लेकर वे चर्चा में आई थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सार्वजनिक रूप से उनके समर्थन का उल्लेख किया था।

वर्ष 2021 में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके संबंध में पुलिसकर्मी के साथ कथित मारपीट या थप्पड़ मारने की खबरें सामने आई थीं। इस घटना को लेकर भी वे विवाद में रहीं।

वर्ष 2023 के चुनावी हलफनामे में उनके विरुद्ध एक आपराधिक मामला घोषित था। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 506, 352, 323, 504, 186 और 34 से संबंधित आरोप दर्ज थे। इन विवरणों को आरोप के रूप में समझना चाहिए और इन्हें दोषसिद्धि के समान नहीं माना जाना चाहिए।

प्रमुख उपलब्धियाँ

  • वर्ष 2003 से 2008 तक पंचायत समिति पोटलिया-भागपुरा की सदस्य रहीं।
  • वर्ष 2005 से 2016 तक पंचायत समिति कुशलगढ़ की प्रधान के रूप में कार्य किया।
  • वर्ष 2018 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कुशलगढ़ विधानसभा चुनाव जीता।
  • वर्ष 2018 में भाजपा प्रत्याशी भीमा भाई को 18,950 मतों से पराजित किया।
  • 15वीं राजस्थान विधानसभा की सदस्य बनीं।
  • वर्ष 2023 में कांग्रेस के टिकट पर कुशलगढ़ विधानसभा चुनाव जीता।
  • वर्ष 2023 में भाजपा प्रत्याशी भीमा भाई को 9,804 मतों के अंतर से पराजित किया।
  • 16वीं राजस्थान विधानसभा की सदस्य बनीं।
  • वर्तमान में Kushalgarh MLA के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
  • आदिवासी महिलाओं के उत्थान से जुड़े सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहने की जानकारी उपलब्ध है।
  • विधानसभा में टीएसपी क्षेत्र, आदिवासी छात्रावास, महिला सुरक्षा, बिजली-पानी और स्थानीय समस्याओं से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।

व्यक्तित्व और सार्वजनिक छवि

रमिला खड़िया की सार्वजनिक पहचान कुशलगढ़ क्षेत्र की महिला आदिवासी नेता और विधायक के रूप में बनी है। स्थानीय निकायों में लंबे समय तक कार्य करने के बाद उन्होंने विधानसभा की राजनीति में प्रवेश किया।

वर्ष 2018 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव जीतना उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का समर्थन किया और वर्ष 2023 में कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की।

उनकी राजनीतिक छवि में स्थानीय स्तर का लंबा प्रशासनिक अनुभव, आदिवासी क्षेत्र से जुड़ाव और महिला नेतृत्व प्रमुख विशेषताएं हैं। कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र से लगातार दो बार विधायक बनने के कारण उनकी क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है।

16वीं विधानसभा में उनकी उपस्थिति और विधानसभा में उठाए गए क्षेत्रीय मुद्दे उनके वर्तमान सार्वजनिक जीवन का हिस्सा हैं। उनके भाषणों में आदिवासी क्षेत्र की समस्याओं और स्थानीय विकास से जुड़े विषयों का उल्लेख सार्वजनिक रूप से सामने आया है।

निष्कर्ष

रमिला खड़िया भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की राजनेता तथा राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की कुशलगढ़ (ST) विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत स्थानीय निकायों से की और पंचायत समिति स्तर पर कार्य करने के बाद विधानसभा की राजनीति में प्रवेश किया।

वर्ष 2018 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और भाजपा प्रत्याशी भीमा भाई को पराजित कर पहली बार विधायक बनीं। बाद में उन्होंने कांग्रेस का समर्थन किया और वर्ष 2023 में कांग्रेस ने उन्हें कुशलगढ़ से अपना उम्मीदवार बनाया।

वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में रमिला खड़िया को 97,480 मत मिले। उन्होंने भाजपा के भीमा भाई को 9,804 मतों के अंतर से पराजित किया और लगातार दूसरी बार विधानसभा सदस्य बनीं। आधिकारिक रिकॉर्ड में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की विधायक के रूप में दर्ज किया गया है।

Ramila Khadiya Biography का प्रमुख आधार उनका कुशलगढ़ क्षेत्र से संबंध, पंचायत स्तर का राजनीतिक अनुभव, वर्ष 2018 की निर्दलीय जीत, कांग्रेस के टिकट पर वर्ष 2023 की जीत तथा Kushalgarh MLA के रूप में वर्तमान कार्यकाल है।

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