मधुकर दत्तात्रेय देवरस का जीवन परिचय - Madhukar Dattatraya Deoras Biography

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मधुकर दत्तात्रेय देवरस

जन्म 11 दिसंबर 1915
जन्म स्थान नागपुर, महाराष्ट्र, भारत
निवास नागपुर, महाराष्ट्र
शिक्षा न्यू इंग्लिश हाई स्कूल, मॉरिस कॉलेज, नागपुर विश्वविद्यालय
शैक्षिक योग्यता बी.ए., एलएल.बी.
व्यवसाय सामाजिक कार्यकर्ता, संगठनकर्ता
पिता दत्तात्रेय कृष्णराव देवरस
माता पार्वतीबाई


मधुकर दत्तात्रेय देवरस (11 दिसंबर 1915 – 17 जून 1996), जिन्हें बालासाहेब देवरस के नाम से अधिक जाना जाता है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के तीसरे सरसंघचालक थे। उन्होंने 5 जून 1973 को RSS के तीसरे सरसंघचालक के रूप में जिम्मेदारी संभाली और 11 मार्च 1994 तक संगठन का नेतृत्व किया।

RSS के आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, देवरस ने अपना पूरा जीवन संघ कार्य के लिए समर्पित किया और संगठन में नागपुर नगर कार्यवाह, सह-सरकार्यवाह तथा सरकार्यवाह सहित विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया।

जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार

मधुकर दत्तात्रेय देवरस का जन्म 11 दिसंबर 1915 को नागपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम दत्तात्रेय कृष्णराव देवरस और माता का नाम पार्वतीबाई था। उनके छोटे भाई भाऊराव देवरस भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख प्रचारकों में शामिल हुए।

उनका परिवार नागपुर में रहता था और बालासाहेब का बचपन इसी वातावरण में बीता। 1925 में RSS की स्थापना के बाद वे कम उम्र में ही संघ की शाखा से जुड़ गए। RSS के अभिलेखों में उनके प्रारंभिक संघ संपर्क और संगठन के प्रति समर्पण का उल्लेख मिलता है।

शिक्षा

बालासाहेब देवरस की पूरी शिक्षा नागपुर में हुई। उन्होंने न्यू इंग्लिश हाई स्कूल से मैट्रिक की शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने मॉरिस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की और आगे नागपुर विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ लॉ से एलएल.बी. की डिग्री प्राप्त की।

कानून की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने वकालत को अपना पेशा नहीं बनाया। उन्होंने अपना जीवन संघ के संगठनात्मक कार्यों के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव

बालासाहेब देवरस कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे। RSS की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी और देवरस शुरुआती वर्षों में ही संघ की शाखा से जुड़े।

डॉ. हेडगेवार ने उन्हें संगठनात्मक कार्य के लिए तैयार किया। बाद में उन्हें बंगाल प्रांत में संघ कार्य के लिए भेजा गया, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें नागपुर वापस बुलाकर नागपुर के संघ कार्य की जिम्मेदारी दी गई।

संगठनात्मक जीवन

बालासाहेब देवरस ने RSS में कई महत्वपूर्ण दायित्व संभाले। वे नागपुर नगर कार्यवाह रहे। इसके बाद उन्होंने सह-सरकार्यवाह के रूप में अखिल भारतीय स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाई।

वर्ष 1965 में उन्हें RSS का सरकार्यवाह बनाया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने संगठन के विभिन्न क्षेत्रों में विस्तार और कार्यकर्ताओं के संगठन पर विशेष ध्यान दिया।

RSS के तीसरे सरसंघचालक

5 जून 1973 को माधव सदाशिवराव गोलवलकर के निधन के बाद मधुकर दत्तात्रेय देवरस RSS के तीसरे सरसंघचालक बने। उस समय उनकी आयु 58 वर्ष थी। RSS के आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बावजूद उन्होंने संगठन के विस्तार और कार्य को प्राथमिकता दी।

उनके नेतृत्व में RSS ने देश के विभिन्न हिस्सों में अपने संगठनात्मक कार्य को आगे बढ़ाया। वे लगातार यात्राएँ करते रहे और स्वयंसेवकों तथा कार्यकर्ताओं से संपर्क बनाए रखा।

सामाजिक समरसता और अस्पृश्यता के विरुद्ध विचार

बालासाहेब देवरस के सार्वजनिक विचारों में सामाजिक समरसता एक महत्वपूर्ण विषय था। उन्होंने हिंदू समाज के भीतर जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता को समाप्त करने पर जोर दिया।

उनके विचारों में समाज के विभिन्न वर्गों के बीच एकता और सामाजिक दूरी कम करने की आवश्यकता प्रमुख रही। RSS से जुड़े स्रोत उन्हें सामाजिक समरसता के विषय को संगठन के सार्वजनिक विमर्श में प्रमुखता देने वाले नेताओं में गिनते हैं।

आपातकाल और RSS

1975 में भारत में आपातकाल लागू होने के बाद RSS पर प्रतिबंध लगा दिया गया और उसके अनेक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। इस अवधि में बालासाहेब देवरस भी जेल में रहे।

आपातकाल के दौरान संघ और उससे जुड़े कार्यकर्ताओं ने सरकार के विरुद्ध लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए अभियान चलाया। देवरस का नेतृत्व इस दौर में RSS की गतिविधियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण रहा।

आपातकाल समाप्त होने और 1977 में जनता पार्टी सरकार बनने के बाद RSS पर लगा प्रतिबंध समाप्त हुआ। इसके बाद संघ की संगठनात्मक गतिविधियाँ फिर से व्यापक रूप से शुरू हुईं।

अयोध्या आंदोलन और सार्वजनिक भूमिका

1980 और 1990 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन भारतीय राजनीति और सामाजिक विमर्श का प्रमुख विषय बना। बालासाहेब देवरस के नेतृत्व में RSS ने इस आंदोलन को संगठनात्मक समर्थन दिया।

1992 में अयोध्या में विवादित ढाँचे के विध्वंस के समय RSS देश के प्रमुख संगठनों में शामिल था। इस पूरे दौर में देवरस RSS के सरसंघचालक थे और संगठन की सार्वजनिक भूमिका को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक राजनीतिक बहस हुई।

संगठन का विस्तार

बालासाहेब देवरस के नेतृत्व में RSS ने अपने संगठनात्मक विस्तार पर विशेष ध्यान दिया। विभिन्न क्षेत्रों में शाखाओं, स्वयंसेवकों और सामाजिक गतिविधियों का विस्तार हुआ।

RSS के आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, देवरस ने संगठन को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचाने और संघ कार्य को व्यापक बनाने पर जोर दिया। उनके नेतृत्व में संगठन ने सामाजिक और सेवा गतिविधियों को भी आगे बढ़ाया।

सरसंघचालक पद से त्यागपत्र

लगातार खराब स्वास्थ्य के कारण बालासाहेब देवरस ने 11 मार्च 1994 को RSS के सरसंघचालक पद से इस्तीफा दिया। वे RSS के पहले सरसंघचालक थे जिन्होंने स्वास्थ्य कारणों से अपने जीवनकाल में पद छोड़ा। उनके बाद राजेंद्र सिंह RSS के चौथे सरसंघचालक बने।

अंतिम समय और निधन

सरसंघचालक पद से हटने के बाद भी बालासाहेब देवरस RSS और उसके कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहे। लंबे समय तक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने के बाद उनका निधन 17 जून 1996 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ। उस समय उनकी आयु 80 वर्ष थी।

उपलब्धियाँ और प्रभाव

  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीसरे सरसंघचालक के रूप में 1973 से 1994 तक नेतृत्व
  • 1965 में RSS के सरकार्यवाह बने
  • RSS के संगठनात्मक विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका
  • सामाजिक समरसता और अस्पृश्यता उन्मूलन के विषय को प्रमुखता दी
  • आपातकाल के दौरान RSS के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका
  • राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान RSS का नेतृत्व
  • संघ के विभिन्न सामाजिक और सेवा कार्यों के विस्तार में योगदान

व्यक्तित्व और विचार

बालासाहेब देवरस का व्यक्तित्व मुख्य रूप से संगठनात्मक क्षमता, अनुशासन और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय हस्तक्षेप से जुड़ा रहा। RSS के आधिकारिक स्रोत उन्हें संगठन के विस्तार और सामाजिक समरसता पर जोर देने वाले सरसंघचालक के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

उनके नेतृत्व में RSS ने सामाजिक समरसता, सेवा और संगठन विस्तार जैसे विषयों पर अधिक जोर दिया। उनके विचारों में हिंदू समाज की एकता और सामाजिक विभाजनों को कम करने की आवश्यकता महत्वपूर्ण रही।

विरासत

बालासाहेब देवरस की विरासत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनात्मक विस्तार और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी है। लगभग 21 वर्षों तक RSS का नेतृत्व करने के दौरान उन्होंने संगठन को विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुँचाने और उसकी गतिविधियों को व्यापक बनाने का प्रयास किया।

उनके छोटे भाई भाऊराव देवरस भी RSS के प्रमुख प्रचारकों में रहे और उत्तर भारत में संगठन के विस्तार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

निष्कर्ष

मधुकर दत्तात्रेय देवरस भारतीय सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीसरे सरसंघचालक के रूप में प्रमुख स्थान रखते हैं। उन्होंने किशोरावस्था में संघ से जुड़ने के बाद संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियाँ निभाईं और 1965 में सरकार्यवाह बनने के बाद अखिल भारतीय स्तर पर महत्वपूर्ण संगठनात्मक भूमिका निभाई।

1973 में RSS के सरसंघचालक बनने के बाद उन्होंने लगभग 21 वर्षों तक संगठन का नेतृत्व किया। सामाजिक समरसता, संगठन विस्तार, आपातकाल और राम जन्मभूमि आंदोलन उनके नेतृत्वकाल के प्रमुख संदर्भ रहे। स्वास्थ्य कारणों से 1994 में पद छोड़ने के बाद 1996 में उनका निधन हुआ।


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