अंकिता भंडारी (Ankita Bhandari) का जीवन परिचय, उम्र, परिवार, शिक्षा, जीवन संघर्ष

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अंकिता भंडारी

जन्म 11 नवंबर 2003
जन्म स्थान दोभ श्रीकोट, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड
निवास पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड
शिक्षा भगत राम मॉडर्न स्कूल; श्री राम इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, देहरादून
शैक्षिक योग्यता कक्षा 12वीं; होटल मैनेजमेंट का प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम अधूरा
व्यवसाय रिसेप्शनिस्ट
पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी
माता सोनी देवी


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अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की रहने वाली एक युवती थीं, जिनकी सितंबर 2022 में हुई हत्या ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। वह ऋषिकेश के निकट स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने और आगे की पढ़ाई के लिए पैसे जुटाने की इच्छा से उन्होंने नौकरी शुरू की थी। उनकी उम्र उस समय 19 वर्ष थी।

18 सितंबर 2022 को अंकिता के लापता होने की सूचना सामने आई। छह दिन बाद, 24 सितंबर को उनका शव चिल्ला नहर से बरामद किया गया। मामले की जांच के दौरान रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों, सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता, को गिरफ्तार किया गया। 30 मई 2025 को उत्तराखंड की एक अदालत ने तीनों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अंकिता की मृत्यु के बाद उत्तराखंड सहित देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। मामले ने महिलाओं की सुरक्षा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, पर्यटन क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की परिस्थितियों और आपराधिक मामलों की निष्पक्ष जांच जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया।

जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार

अंकिता भंडारी का जन्म 11 नवंबर 2003 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के दोभ श्रीकोट गांव में हुआ था। उनका परिवार साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़ा था। उनके पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते थे, जबकि उनकी माता सोनी देवी परिवार की देखभाल करती थीं।

अंकिता के पिता चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो। परिवार ने उनकी शिक्षा के लिए प्रयास किए और बेहतर अवसरों की तलाश में गांव से पौड़ी नगर की ओर रहने का निर्णय लिया। अंकिता की प्रारंभिक पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय में हुई।

उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। इसके बावजूद अंकिता ने पढ़ाई जारी रखी और आगे चलकर होटल प्रबंधन के क्षेत्र में काम करने की इच्छा व्यक्त की। उनका सपना नौकरी के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना और भविष्य में अपनी शिक्षा आगे बढ़ाना था।

शिक्षा

अंकिता ने पौड़ी नगर के भगत राम मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई की। वर्ष 2020 में उन्होंने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 12वीं की परीक्षा वाणिज्य विषय के साथ 89 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की थी।

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने होटल प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षण लेने का निर्णय किया। वर्ष 2021 में वह देहरादून स्थित श्री राम इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट में एक वर्षीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम में दाखिल हुईं।

इसी अवधि में कोरोना महामारी और उससे जुड़ी आर्थिक परेशानियों के कारण उनके परिवार की आमदनी प्रभावित हुई। उनके पिता की सुरक्षा गार्ड की नौकरी भी चली गई थी। आर्थिक कठिनाइयों के चलते परिवार के लिए उनकी पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो गया। फीस का बकाया बढ़ने के बाद अंकिता को अपना पाठ्यक्रम बीच में छोड़ना पड़ा।

पढ़ाई अधूरी रहने के बावजूद उन्होंने काम करने का निर्णय लिया। वह होटल और आतिथ्य क्षेत्र में अनुभव हासिल करना चाहती थीं, ताकि अपने परिवार की आर्थिक सहायता कर सकें और भविष्य में आगे पढ़ाई करने के लिए पैसे जुटा सकें।

नौकरी और करियर

वनंतरा रिजॉर्ट में नौकरी

अगस्त 2022 में अंकिता को ऋषिकेश के निकट पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर क्षेत्र में स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में नौकरी मिली। यह रिजॉर्ट गंगा भोगपुर क्षेत्र में था और इसका संचालन पुलकित आर्य करता था।

अंकिता ने 28 अगस्त 2022 को रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम शुरू किया। उनकी मासिक तनख्वाह 10,000 रुपये तय होने की बात समाचार रिपोर्टों में सामने आई थी।

नौकरी मिलने से अंकिता को अपने परिवार की मदद करने और भविष्य के लिए बचत करने की उम्मीद थी। उन्होंने होटल प्रबंधन का प्रशिक्षण लिया था और आतिथ्य क्षेत्र में काम करने की इच्छा रखती थीं। हालांकि, वह इस नौकरी में कुछ ही सप्ताह काम कर पाईं।

परिवार से दूर काम करने की परिस्थितियाँ

अंकिता का परिवार पौड़ी गढ़वाल में रहता था, जबकि उनका कार्यस्थल ऋषिकेश के निकट था। पहाड़ी क्षेत्र में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण उन्हें नौकरी के लिए घर से दूर जाना पड़ा।

उनकी कहानी ने इस बात पर भी ध्यान आकर्षित किया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की युवतियों को शिक्षा और रोजगार के बीच किस तरह कठिन निर्णय लेने पड़ सकते हैं। अंकिता ने परिवार की मदद करने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद में नौकरी स्वीकार की थी।

अंकिता भंडारी हत्याकांड

लापता होने की घटना

18 सितंबर 2022 को अंकिता के लापता होने की सूचना सामने आई। वह उस समय वनंतरा रिजॉर्ट में कार्यरत थीं। उनके लापता होने के बाद मामले की जांच शुरू हुई और घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठे।

24 सितंबर 2022 को अंकिता का शव ऋषिकेश के निकट चिल्ला नहर से बरामद किया गया। शव मिलने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया और पुलिस ने हत्या के संदेह में जांच आगे बढ़ाई।

आरोपियों की गिरफ्तारी

जांच के दौरान रिजॉर्ट के संचालक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया। पुलिस और अभियोजन पक्ष ने घटनाक्रम, गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मामला तैयार किया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, अंकिता पर रिजॉर्ट में आने वाले एक अतिथि को कथित तौर पर विशेष सेवाएँ देने का दबाव बनाया गया था। इस कथित दबाव का विरोध करने के बाद उनके साथ विवाद हुआ। इस घटनाक्रम को अभियोजन पक्ष ने हत्या के मामले में महत्वपूर्ण माना।

मामले की जांच के दौरान कथित अतिथि या वीआईपी की पहचान को लेकर भी सार्वजनिक चर्चा हुई। हालांकि, इस विषय से जुड़े अलग-अलग दावों और आरोपों को अदालत में सिद्ध तथ्यों से अलग समझना आवश्यक है। किसी व्यक्ति के बारे में केवल सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों के आधार पर उसकी संलिप्तता को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

अदालत का फैसला

30 मई 2025 को पौड़ी गढ़वाल जिले से संबंधित अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में दोषी ठहराया। अदालत ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया।

अदालत के फैसले के बाद भी अंकिता के परिवार ने मामले के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए और कथित वीआईपी की भूमिका की जांच की मांग जारी रखी। इस मांग को हत्या के मामले में तीन दोषियों की दोषसिद्धि से अलग विषय के रूप में देखना चाहिए।

मामले से जुड़ी सार्वजनिक प्रतिक्रिया

अंकिता भंडारी की हत्या के बाद उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कठोर सजा देने की मांग की। इस घटना ने महिलाओं की सुरक्षा और कार्यस्थलों पर उनके साथ होने वाले व्यवहार को लेकर भी गंभीर चर्चा शुरू की।

अंकिता का मामला विशेष रूप से इसलिए चर्चा में रहा क्योंकि वह आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे परिवार की युवती थीं और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए घर से दूर नौकरी कर रही थीं। उनकी मृत्यु ने रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों या पर्यटन स्थलों पर जाने वाली युवतियों की सुरक्षा के प्रश्न को भी सामने रखा।

अदालत द्वारा तीन आरोपियों को सजा दिए जाने के बाद उनके परिवार ने मामले के अन्य पहलुओं की जांच की मांग जारी रखी। समय-समय पर कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बहस भी हुई। इस संबंध में किसी भी दावे का मूल्यांकन आधिकारिक जांच, न्यायिक रिकॉर्ड और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।

सीबीआई जांच की मांग और आगे की कानूनी स्थिति

अंकिता के परिवार ने मामले से जुड़े कथित वीआईपी पहलू की विस्तृत जांच की मांग की है। वर्ष 2026 में यह मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में आया। परिवार की मांग रही कि मामले के उन पहलुओं की भी जांच हो, जिनके बारे में उन्हें लगता है कि अब तक पर्याप्त स्पष्टता नहीं आई है।

अक्टूबर 2026 में प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के अनुसार, मामले में दोषी ठहराए गए तीनों व्यक्तियों की जमानत याचिकाएँ फिर खारिज की गईं। दोषियों की ओर से निचली अदालत के फैसले के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया जारी रहने की खबरें भी सामने आईं।

मामले में किसी कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों और अदालत द्वारा तीन व्यक्तियों को हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है। किसी अन्य व्यक्ति की कथित संलिप्तता के बारे में अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

अंकिता भंडारी की विरासत

अंकिता भंडारी का जीवन कम उम्र में ही समाप्त हो गया, लेकिन उनकी मृत्यु से जुड़ा मामला महिलाओं की सुरक्षा, कार्यस्थल पर सम्मान और न्यायिक जवाबदेही से संबंधित चर्चाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

उनका जीवन यह भी दिखाता है कि सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद युवा अपने परिवार की मदद करने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रयास करते हैं। अंकिता ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद होटल प्रबंधन के क्षेत्र में आगे बढ़ने की कोशिश की थी। परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़कर नौकरी करनी पड़ी।

उनकी मृत्यु के बाद परिवार ने न्याय की मांग जारी रखी। मामले में दोषियों को सजा मिलना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण परिणाम था, जबकि परिवार द्वारा उठाए गए अतिरिक्त सवालों का उत्तर आधिकारिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से स्पष्ट होना आवश्यक है।

निष्कर्ष

अंकिता भंडारी उत्तराखंड की एक युवा महिला थीं, जो अपने परिवार की आर्थिक सहायता करने और भविष्य में आगे बढ़ने की उम्मीद लेकर नौकरी करने निकली थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया। मई 2025 में अदालत ने इस मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अंकिता का मामला आज भी महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार के अवसरों, कार्यस्थल पर सम्मान और न्याय की मांग से जुड़ी चर्चाओं में याद किया जाता है। उनके परिवार की ओर से उठाए गए अतिरिक्त सवालों पर तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक जांच और न्यायिक निष्कर्षों को ही आधार बनाया जाना चाहिए।


स्रोत