Shri Khema Baba: Difference between revisions
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Latest revision as of 16:59, 11 February 2026

सिद्ध श्री खेमा बाबा राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में अत्यंत प्रसिद्ध लोकदेवता और संत पुरुष रहे हैं। उन्हें भक्ति, तपस्या और चमत्कारों के कारण श्रद्धा से पूजा जाता है, खासकर उन लोगों द्वारा जो सांप, बिच्छू, दुष्कर रोगों और कठिनाईयों से मुक्ति की कामना करते हैं। उनकी समाधि स्थल बायतु, बाड़मेर जिले में स्थित है और वहाँ प्रतिवर्ष लाखों भक्त मेले और जागरण में भाग लेते हैं।
सिद्ध श्री खेमा बाबा का प्रारंभिक जीवन, जन्म और परिवार
श्री खेमा बाबा का जन्म विक्रम संवत 1932 फाल्गुन वदी छठ (फागुन महीने के सोमवार) को धारणा धोरा, बायतु, बाड़मेर (राजस्थान) में हुआ था। उनके पिता का नाम कानाराम जी और माता का नाम रूपांदे देवी था। वे जाखड़ (जाट) परिवार से थे। बचपन से ही उन्हें भक्ति की ओर झुकाव दिखाई दिया और गाय चराने के दौरान भी वे भगवत भक्ति में लीन रहते थे। उनके पूर्वज पहले जोधपुर जिले के ओसियां के पास रहे थे, लेकिन बाद में बाड़मेर के बायतु में बस गए।
सिद्ध श्री खेमा बाबा की शिक्षा और प्रारंभिक जीवन
खेमा बाबा की औपचारिक शिक्षा नहीं हुई, बल्कि उन्होंने गौचर-चराई, भक्ति, साधना और लोक धर्म संस्कारों से जीवन का मार्ग सीखा। बचपन से ही उनका मन आत्म-तपस्या और भजन की ओर आकर्षित था, जिससे वे साधना में अधिक समय बिताने लगे। उम्र बढ़ने पर उनकी भक्ति और ध्यान की गहराई बढ़ती गई और वे समाज में लोक संत के रूप में पहचाने जाने लगे।
सिद्ध श्री खेमा बाबा का विवाह और पारिवारिक जीवन
खेमा बाबा का विवाह विक्रम संवत 1958 आसोज सुदी आठम शुक्रवार को नोसर गाँव की वीरों देवी के साथ हुआ, जिनसे उनकी एक पुत्री नेनीबाई हुई। विवाह के बाद भी भगवान के प्रति उनकी भक्ति और ध्यान अपरिवर्तित रहे और उन्होंने आध्यात्मिक साधना और सेवा को अपना मुख्य जीवन लक्ष्य बनाया।
सिद्ध श्री खेमा बाबा की तपस्या, सिद्धियाँ और चमत्कार
समय के साथ खेमा बाबा ने कठिन तपस्या, ध्यान और भक्ति के माध्यम से सिद्धियाँ प्राप्त कीं, जिससे वे चमत्कारिक कार्य कर पाए। कहा जाता है कि उन्होंने:
- रोगों का निवारण किया, जिसमें दमा, कोढ़ और गंभीर आयुर्वेदिक बीमारियाँ भी शामिल हैं।
- मृत पशुओं को पुनर्जीवित किया।
- सांप और बिच्छू के डंक से प्रभावित लोगों को राहत दी।
- भक्तों की समस्याओं का समाधान किया। ये चमत्कार उन्हें लोकदेव के रूप में स्थापित करने का मुख्य कारण बने।
सिद्ध श्री खेमा बाबा की समाधि और मृत्युदिन
अंत में, उन्होंने विक्रम संवत 1989 फाल्गुन महीने में भगवन भोलेनाथ का जाप करते हुए संसार का त्याग किया और समाधि ले ली। उनकी समाधि बायतु में बनाई गई, जहाँ आज भी भक्त उनकी पूजा करते हैं और श्रद्धा के साथ उनकी समाधि स्थल पर आते हैं।
सिद्ध श्री खेमा बाबा के मेले और लोक आस्था
खेमा बाबा की स्मृति में उनके समाधि स्थल पर प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल नवमी को मेले का आयोजन होता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु मारवाड़, राजस्थान और आसपास के राज्यों से भाग लेते हैं। भजन, जागरण और अन्य धार्मिक आयोजन इस अवसर पर आयोजित होते हैं, जो उनकी लोक आस्था की जीवंतता को दर्शाते हैं।
स्रोत (Sources)
इस जीवनी की जानकारी निम्नलिखित विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है:
- TheSimpleHelp — खेमा बाबा का इतिहास और जीवन परिचय (हिंदी)
- Wikipedia / Khema Baba Temple — मंदिर और लोक आस्था की जानकारी
- Jatland — खेमा बाबा के मेले और श्रद्धा संबंधी विवरण