Jawaharlal Nehru: Difference between revisions

From Marupedia
Jump to navigation Jump to search
Created page with "{{DISPLAYTITLE: जवाहरलाल नेहरू का जीवन परिचय | Jawaharlal Nehru Biography}} {{Biography infobox | name = जवाहरलाल नेहरू | image = Jawaharlal_Nehru_Biography.jpg | birth = 14 नवंबर 1889 | birthplace = इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत | residence = नई दिल्ली, भारत | education = ट्रिनिटी कॉलेज,..."
 
 
Line 127: Line 127:


* [[Lal Krishna Advani|लाल कृष्ण आडवाणी]]
* [[Lal Krishna Advani|लाल कृष्ण आडवाणी]]
* [[Kirori Lal Meena|किरोड़ी लाल मीणा]]
* [[Kirodi lal Meena|किरोड़ी लाल मीणा]]
* [[Jagdeep Dhankhar|जगदीप धनखड़]]
* [[Jagdeep Dhankhar|जगदीप धनखड़]]
* [[Sanjay Sharma|संजय शर्मा]]
* [[Sanjay Sharma|संजय शर्मा]]

Latest revision as of 18:48, 18 June 2026


जवाहरलाल नेहरू

जन्म 14 नवंबर 1889
जन्म स्थान इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
निवास नई दिल्ली, भारत
शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज; इनर टेम्पल, लंदन
शैक्षिक योग्यता प्राकृतिक विज्ञान में स्नातक, बैरिस्टर
व्यवसाय राजनेता, स्वतंत्रता सेनानी, लेखक
पिता मोतीलाल नेहरू
माता स्वरूप रानी नेहरू
पति/पत्नी कमला नेहरू
बच्चे इंदिरा गांधी


जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) भारत के प्रथम प्रधानमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी, लेखक और आधुनिक भारत के प्रमुख निर्माताओं में से एक थे। उन्होंने स्वतंत्र भारत के निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थापना, औद्योगिक विकास, वैज्ञानिक प्रगति और विदेश नीति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल थे और महात्मा गांधी के निकट सहयोगी रहे।

परिचय

जवाहरलाल नेहरू भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नेताओं में से एक थे। वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने और 15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 तक इस पद पर कार्यरत रहे।

उनके नेतृत्व में भारत ने लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को मजबूत किया तथा योजनाबद्ध आर्थिक विकास, औद्योगिकीकरण और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा दिया। आधुनिक भारत की कई महत्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना उनके कार्यकाल में हुई।

जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार

जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज), उत्तर प्रदेश में एक समृद्ध और प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था।

उनके पिता मोतीलाल नेहरू प्रसिद्ध वकील और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। उनकी माता का नाम स्वरूप रानी नेहरू था।

बचपन से ही उन्हें उच्च स्तर की शिक्षा और बौद्धिक वातावरण प्राप्त हुआ। उनके परिवार का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा।

वर्ष 1916 में उनका विवाह कमला नेहरू से हुआ। उनकी एकमात्र संतान इंदिरा गांधी थीं, जो आगे चलकर भारत की प्रधानमंत्री बनीं।

शिक्षा

जवाहरलाल नेहरू ने प्रारंभिक शिक्षा घर पर निजी शिक्षकों से प्राप्त की।

इसके बाद वे इंग्लैंड गए, जहाँ उन्होंने हैरो स्कूल में अध्ययन किया। बाद में उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से प्राकृतिक विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

उच्च शिक्षा के बाद उन्होंने लंदन के इनर टेम्पल से विधि की पढ़ाई पूरी की और बैरिस्टर बने।

स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका

भारत लौटने के बाद जवाहरलाल नेहरू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई।

महात्मा गांधी के नेतृत्व में उन्होंने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन सहित अनेक आंदोलनों में भाग लिया।

स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित किया।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में नेतृत्व

जवाहरलाल नेहरू कई बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित हुए।

वर्ष 1929 के लाहौर अधिवेशन में उनकी अध्यक्षता में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित किया। यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।

कांग्रेस में उनकी लोकप्रियता और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख पहचान दिलाई।

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री

15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के साथ ही जवाहरलाल नेहरू देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने।

उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, संविधान के आदर्शों को लागू करने और देश के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वे लगातार तीन आम चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व में विजयी रहे और अपने निधन तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहे।

औद्योगिक और वैज्ञानिक विकास

जवाहरलाल नेहरू ने भारत के औद्योगिक विकास को विशेष महत्व दिया।

उनके कार्यकाल में भाखड़ा नांगल बांध, हीराकुंड बांध और अनेक सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग स्थापित किए गए।

उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) की अवधारणा, वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों तथा परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को प्रोत्साहित किया।

विदेश नीति और गुटनिरपेक्ष आंदोलन

जवाहरलाल नेहरू भारत की विदेश नीति के प्रमुख वास्तुकार माने जाते हैं।

उन्होंने पंचशील सिद्धांतों को बढ़ावा दिया और विश्व राजनीति में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनकी विदेश नीति का उद्देश्य भारत की स्वतंत्र पहचान बनाए रखना और विश्व शांति को प्रोत्साहित करना था।

लेखक के रूप में योगदान

जवाहरलाल नेहरू एक प्रसिद्ध लेखक भी थे।

उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखीं जिनमें The Discovery of India, Glimpses of World History और An Autobiography विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।

उनकी रचनाएँ इतिहास, राजनीति और भारतीय सभ्यता को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

सम्मान और विरासत

जवाहरलाल नेहरू को आधुनिक भारत के निर्माण में उनके योगदान के लिए व्यापक सम्मान प्राप्त है।

उनके जन्मदिन 14 नवंबर को भारत में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। बच्चों के प्रति उनके स्नेह के कारण उन्हें चाचा नेहरू के नाम से भी जाना जाता है।

निधन

27 मई 1964 को नई दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू का निधन हो गया।

उनके निधन के साथ स्वतंत्र भारत के प्रारंभिक दौर का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हुआ। आज भी उन्हें आधुनिक भारत के प्रमुख निर्माताओं में गिना जाता है।

उपलब्धियाँ और प्रभाव

  • स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री
  • भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता
  • आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान
  • गुटनिरपेक्ष आंदोलन के प्रमुख स्थापकों में शामिल
  • वैज्ञानिक और औद्योगिक विकास के समर्थक
  • प्रसिद्ध लेखक और चिंतक

व्यक्तित्व और विचार

जवाहरलाल नेहरू लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक न्याय के समर्थक थे।

वे आधुनिक, प्रगतिशील और उदारवादी विचारधारा में विश्वास रखते थे। उनके विचारों का भारतीय राजनीति और प्रशासन पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा है।

निष्कर्ष

जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण नेताओं में से एक थे। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने देश को लोकतांत्रिक, वैज्ञानिक और आधुनिक दिशा प्रदान की। उनकी विरासत आज भी भारतीय राजनीति, शिक्षा, विज्ञान और विकास की अनेक संस्थाओं में दिखाई देती है।

संबंधित लेख