Sadhvi Prem Baisa: Difference between revisions
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[[File:साध्वी प्रेम बाईसा.jpg|thumb|साध्वी प्रेम बाईसा]] | {{DISPLAYTITLE:साध्वी प्रेम बाईसा (Sadhvi Prem Baisa) का जीवन परिचय}} | ||
साध्वी प्रेम बाईसा राजस्थान की एक सुप्रसिद्ध भागवत कथा वाचक थी, जिनकी मधुर वाणी और सरल व्याख्यान के कारण उनकी अच्छी खासी पहचान है। मूल रूप से बाड़मेर जिले के परेऊ गांव की रहने वाली साध्वी प्रेम बाईसा का परिवार जाट जाति (साईं) से आता है। उनके पिता, जो अब महंत विरमनाथ के नाम से जाने जाते हैं, गृहस्थ जीवन छोड़कर संन्यास धारण कर चुके हैं। साध्वी प्रेम बाईसा ने छोटी उम्र में ही धार्मिक दीक्षा लेकर कथा वाचन और भजन गायन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। जोधपुर में उनका साधना कुटी नाम से एक आश्रम भी है। उन्हें धर्म और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रूप से देखा जाता था। लेकिन 28 जनवरी 2026 को जोधपुर मे संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। | [[File:साध्वी प्रेम बाईसा.jpg|thumb|'''साध्वी प्रेम बाईसा (Sadhvi Prem Baisa)''']] | ||
'''साध्वी प्रेम बाईसा (Sadhvi Prem Baisa)''' राजस्थान की एक सुप्रसिद्ध भागवत कथा वाचक थी, जिनकी मधुर वाणी और सरल व्याख्यान के कारण उनकी अच्छी खासी पहचान है। मूल रूप से बाड़मेर जिले के परेऊ गांव की रहने वाली साध्वी प्रेम बाईसा का परिवार जाट जाति (साईं) से आता है। उनके पिता, जो अब महंत विरमनाथ के नाम से जाने जाते हैं, गृहस्थ जीवन छोड़कर संन्यास धारण कर चुके हैं। साध्वी प्रेम बाईसा ने छोटी उम्र में ही धार्मिक दीक्षा लेकर कथा वाचन और भजन गायन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। जोधपुर में उनका साधना कुटी नाम से एक आश्रम भी है। उन्हें धर्म और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रूप से देखा जाता था। लेकिन 28 जनवरी 2026 को जोधपुर मे संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। | |||
== साध्वी प्रेम बाईसा का प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि == | == साध्वी प्रेम बाईसा का प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि == | ||