Prakash Mali: Difference between revisions

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'''प्रकाश माली''' एक प्रसिद्ध राजस्थानी भजन गायक हैं, जिन्हें '''“भजन सम्राट”''' के नाम से जाना जाता है। उनकी मधुर आवाज और भक्ति से भरे गीतों ने उन्हें न केवल राजस्थान में, बल्कि पूरे भारत और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच लोकप्रिय बनाया है। '''प्रकाश माली''' का जीवन एक साधारण परिवार से शुरू होकर संगीत की दुनिया में शोहरत की ऊंचाइयों तक पहुंचने की प्रेरणादायक कहानी है।
'''प्रकाश माली''' एक प्रसिद्ध राजस्थानी भजन गायक हैं, जिन्हें '''“भजन सम्राट”''' के नाम से जाना जाता है। उनकी मधुर आवाज और भक्ति से भरे गीतों ने उन्हें न केवल राजस्थान में, बल्कि पूरे भारत और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच लोकप्रिय बनाया है। '''प्रकाश माली''' का जीवन एक साधारण परिवार से शुरू होकर संगीत की दुनिया में शोहरत की ऊंचाइयों तक पहुंचने की प्रेरणादायक कहानी है।
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प्रकाश माली को असली पहचान तब मिली जब वे राजस्थान में जागरणों और भजन संध्याओं के नियमित गायक बन गए। उनके भजनों में भक्ति, सादगी और ग्रामीण संस्कृति का अनूठा संगम था, जो श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ता था। उनके कुछ सबसे लोकप्रिय भजनों में शामिल हैं:
प्रकाश माली को असली पहचान तब मिली जब वे राजस्थान में जागरणों और भजन संध्याओं के नियमित गायक बन गए। उनके भजनों में भक्ति, सादगी और ग्रामीण संस्कृति का अनूठा संगम था, जो श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ता था। उनके कुछ सबसे लोकप्रिय भजनों में शामिल हैं:


– **”म्हारी माँ रानी सती”** – यह भजन रानी सती माता को समर्पित है और उनकी भक्ति का प्रतीक है।
'''म्हारी माँ रानी सती''' – यह भजन रानी सती माता को समर्पित है और उनकी भक्ति का प्रतीक है।


– **”लीलण रो आसवारी”** – इस गीत में राजस्थानी लोक संगीत की मिठास झलकती है।
'''लीलण रो आसवारी''' – इस गीत में राजस्थानी लोक संगीत की मिठास झलकती है।


– **”जय माता दी”** – यह भजन माता वैष्णो देवी को समर्पित है और देशभर में प्रसिद्ध हुआ।
'''जय माता दी''' – यह भजन माता वैष्णो देवी को समर्पित है और देशभर में प्रसिद्ध हुआ।


– **”सतगुरु म्हारा”** – इस भजन में गुरु भक्ति की भावना व्यक्त की गई है।
'''सतगुरु म्हारा''' – इस भजन में गुरु भक्ति की भावना व्यक्त की गई है।


– **”बाबोसा भगवान”** – यह गीत बाबा रामदेव को समर्पित है और राजस्थान में खूब पसंद किया जाता है।
'''बाबोसा भगवान''' – यह गीत बाबा रामदेव को समर्पित है और राजस्थान में खूब पसंद किया जाता है।


प्रकाश माली की गायकी की खासियत यह थी कि वे पारंपरिक भजनों को आधुनिक अंदाज में पेश करते थे, जिससे युवा पीढ़ी भी उनके संगीत से जुड़ने लगी। सोशल मीडिया और यूट्यूब के आने के बाद उनकी लोकप्रियता में और इजाफा हुआ। उनके भजनों के वीडियो लाखों बार देखे गए और उनके यूट्यूब चैनल पर प्रशंसकों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
प्रकाश माली की गायकी की खासियत यह थी कि वे पारंपरिक भजनों को आधुनिक अंदाज में पेश करते थे, जिससे युवा पीढ़ी भी उनके संगीत से जुड़ने लगी। सोशल मीडिया और यूट्यूब के आने के बाद उनकी लोकप्रियता में और इजाफा हुआ। उनके भजनों के वीडियो लाखों बार देखे गए और उनके यूट्यूब चैनल पर प्रशंसकों की संख्या लगातार बढ़ती गई।

Latest revision as of 11:07, 28 January 2026

Prakash Mali

प्रकाश माली एक प्रसिद्ध राजस्थानी भजन गायक हैं, जिन्हें “भजन सम्राट” के नाम से जाना जाता है। उनकी मधुर आवाज और भक्ति से भरे गीतों ने उन्हें न केवल राजस्थान में, बल्कि पूरे भारत और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच लोकप्रिय बनाया है। प्रकाश माली का जीवन एक साधारण परिवार से शुरू होकर संगीत की दुनिया में शोहरत की ऊंचाइयों तक पहुंचने की प्रेरणादायक कहानी है।

प्रकाश माली का जन्म और प्रारंभिक जीवन

प्रकाश माली का जन्म 23 अगस्त 1981 को राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक छोटे से गांव, शिवकर, में हुआ था। Prakash Mali का जन्म एक मध्यमवर्गीय माली परिवार में हुआ, जहां खेती और मेहनत जीवन का आधार थी। उनके पिता का नाम बंशीलाल माली और दादा का नाम केशाराम माली था। प्रकाश माली के जन्म के तीन साल बाद, जब वे मात्र तीन वर्ष के थे, उनका परिवार बाड़मेर जिले की बालोतरा तहसील में बस गया। बालोतरा में रहते हुए Prakash Mali का बचपन ग्रामीण परिवेश में बीता, जहां संसाधनों की कमी थी, लेकिन सपनों की कोई सीमा नहीं थी।

बचपन से ही प्रकाश को संगीत से गहरा लगाव था। गांव में होने वाले भजन कीर्तन और जागरण जैसे धार्मिक आयोजनों में वे अक्सर शामिल होते थे। उनकी मधुर आवाज और संगीत के प्रति जुनून ने उन्हें कम उम्र में ही स्थानीय लोगों का ध्यान आकर्षित किया। स्कूल में सुबह की प्रार्थना के दौरान वे पूरे भाव के साथ गाते थे और संगीत में डूब जाया करते थे। यह वह दौर था जब उनके मन में एक सपना पनप रहा था कि वे बड़े होकर संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाएंगे।

प्रकाश माली की शिक्षा

प्रकाश माली की प्रारंभिक शिक्षा बालोतरा में हुई। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई स्थानीय स्कूलों से पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ उनकी रुचि संगीत की ओर बढ़ती गई। दसवीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते उन्होंने भजन गायन और संगीत को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया था। बाद में उन्होंने बारहवीं कक्षा तक की शिक्षा पूरी की, लेकिन संगीत के प्रति उनका झुकाव इतना प्रबल था कि उन्होंने इसे अपने करियर के रूप में चुन लिया।

हालांकि प्रकाश की औपचारिक शिक्षा ज्यादा आगे नहीं बढ़ी, लेकिन उनकी संगीतमयी शिक्षा जीवन के अनुभवों और जागरणों में भागीदारी से हुई। वे जागरणों में जाकर वाद्य यंत्र बजाना सीखते थे और भजनों को गहराई से समझते थे। इस दौरान उन्होंने वीणा, ढोलक, पेटी और तबला जैसे वाद्य यंत्रों में महारत हासिल की। उनकी यह आत्म-शिक्षा बाद में उनके संगीत करियर की मजबूत नींव बनी।

प्रकाश माली का परिवार

प्रकाश माली का परिवार उनकी सफलता में एक महत्वपूर्ण आधार रहा है। उनके पिता बंशीलाल माली एक मेहनती किसान थे, जो परिवार के लिए दिन-रात मेहनत करते थे। प्रकाश के दो भाई, गजेंद्र माली और महेंद्र माली, भी उनके जीवन का हिस्सा हैं। हालांकि उनके माता का नाम सार्वजनिक रूप से उल्लेखित नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट है कि परिवार ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें प्रोत्साहित किया।

प्रकाश माली की शादी 1 दिसंबर 2002 को भावना माली से हुई। भावना उनके जीवन में एक सहायक और प्रेरणास्रोत रही हैं। दंपति के दो बच्चे हैं—हर्षित माली और लक्षित माली। प्रकाश अपने परिवार के साथ बालोतरा में रहते हैं और अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद अपने बच्चों और पत्नी के साथ समय बिताना पसंद करते हैं। उनका परिवार आज भी उनकी जड़ों से जुड़ा हुआ है और उनकी सफलता में गर्व महसूस करता है।

प्रकाश माली का संगीत करियर की शुरुआत

प्रकाश माली का संगीत करियर तब शुरू हुआ जब वे जागरणों और भजन संध्याओं में गाने लगे। शुरुआती दिनों में उनके पिता को उनका यह शौक पसंद नहीं था, क्योंकि उस समय भजन गायन से आजीविका चलाना मुश्किल माना जाता था। पिता की डांट से बचने के लिए प्रकाश रात में चुपके से घर से निकलकर जागरणों में जाते थे। एक बार तो पिता की डांट से नाराज होकर वे साइकिल से 100 किलोमीटर दूर अपने दादा के पास शिवकर गांव चले गए थे। यह घटना उनके संगीत के प्रति जुनून को दर्शाती है।

प्रकाश ने अपने शुरुआती दिनों में जीवन यापन के लिए एक सीडी की दुकान भी चलाई, जहां वे भजनों और लोकगीतों की रिकॉर्डिंग बेचते थे। इस दौरान उन्होंने अपनी गायकी को निखारा और धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर पहचान बनानी शुरू की। उनका पहला बड़ा मौका तब आया जब उन्होंने भजनों को मंच पर प्रस्तुत करना शुरू किया। उनकी मधुर आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुति ने उन्हें जल्द ही लोगों का चहेता बना दिया।

प्रकाश माली के लोकप्रियता और प्रसिद्धि

प्रकाश माली को असली पहचान तब मिली जब वे राजस्थान में जागरणों और भजन संध्याओं के नियमित गायक बन गए। उनके भजनों में भक्ति, सादगी और ग्रामीण संस्कृति का अनूठा संगम था, जो श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ता था। उनके कुछ सबसे लोकप्रिय भजनों में शामिल हैं:

म्हारी माँ रानी सती – यह भजन रानी सती माता को समर्पित है और उनकी भक्ति का प्रतीक है।

लीलण रो आसवारी – इस गीत में राजस्थानी लोक संगीत की मिठास झलकती है।

जय माता दी – यह भजन माता वैष्णो देवी को समर्पित है और देशभर में प्रसिद्ध हुआ।

सतगुरु म्हारा – इस भजन में गुरु भक्ति की भावना व्यक्त की गई है।

बाबोसा भगवान – यह गीत बाबा रामदेव को समर्पित है और राजस्थान में खूब पसंद किया जाता है।

प्रकाश माली की गायकी की खासियत यह थी कि वे पारंपरिक भजनों को आधुनिक अंदाज में पेश करते थे, जिससे युवा पीढ़ी भी उनके संगीत से जुड़ने लगी। सोशल मीडिया और यूट्यूब के आने के बाद उनकी लोकप्रियता में और इजाफा हुआ। उनके भजनों के वीडियो लाखों बार देखे गए और उनके यूट्यूब चैनल पर प्रशंसकों की संख्या लगातार बढ़ती गई।

प्रकाश माली के लाइव प्रोग्राम

प्रकाश माली ने अपने करियर में सैकड़ों लाइव प्रोग्राम किए हैं। वे राजस्थान के विभिन्न शहरों जैसे जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर के अलावा देश के अन्य हिस्सों जैसे मुंबई, दिल्ली, सूरत और अहमदाबाद में भी प्रस्तुति दे चुके हैं। उनके लाइव शो में भक्ति और उत्साह का माहौल होता है, और लोग उनके भजनों पर रात भर झूमते हैं। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय भी उनके कार्यक्रमों का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

प्रकाश माली का व्यक्तित्व और जीवन दर्शन

प्रकाश माली का व्यक्तित्व उनकी सादगी और भक्ति से परिभाषित होता है। वे एक शांत और सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं, जो अपनी कला के जरिए लोगों तक सकारात्मक संदेश पहुँचाते हैं। उनके भजनों में देशभक्ति, सामाजिक एकता और भक्ति की भावना झलकती है। वे मानते हैं कि संगीत सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और प्रेरित करने का माध्यम भी है।

प्रकाश को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी जुड़ाव है और वे एक पक्के राष्ट्रभक्त हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुत पसंद करते हैं और उनके सामने सूरत, गुजरात में गाने का अवसर मिलना उनके लिए सबसे बड़ी खुशी का क्षण था। वे जागरणों में भजनों पर नृत्य करने के सख्त खिलाफ हैं और कई बार इसका विरोध भी कर चुके हैं। उनकी यह मान्यता उनकी धार्मिकता और भक्ति के प्रति सम्मान को दर्शाती है।

प्रकाश माली के विवाद और चुनौतियाँ

प्रकाश माली का जीवन हमेशा आसान नहीं रहा। शुरुआती दिनों में उन्हें परिवार के विरोध और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, उनके करियर में कुछ विवाद भी सामने आए। एक बार उन पर कुछ लोगों ने गलत आरोप लगाए, लेकिन उनकी ईमानदारी और प्रशंसकों के समर्थन ने उन्हें इन चुनौतियों से उबार लिया। इन कठिनाइयों ने उन्हें और मजबूत बनाया।

प्रकाश माली की उपलब्धियाँ और प्रभाव

प्रकाश माली ने कम समय में ही संगीत के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल किया है। उनकी गायकी ने राजस्थानी भक्ति संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। वे पुरानी परंपराओं को नई पीढ़ी तक ले जाने में सफल रहे हैं। उनके भजनों ने लोगों को धार्मिकता, संस्कृति और देशभक्ति से जोड़ा है। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें “भजन सम्राट” की उपाधि दी गई है।

प्रकाश माली का जीवन एक साधारण ग्रामीण परिवार से शुरू होकर संगीत की दुनिया में शोहरत की ऊंचाइयों तक पहुंचने की प्रेरणादायक गाथा है। उनका जन्म, शिक्षा, परिवार और करियर यह दर्शाते हैं कि मेहनत और लगन से कोई भी अपने सपनों को साकार कर सकता है। उनकी मधुर आवाज और भावपूर्ण भजनों ने लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई है। वे न केवल एक गायक हैं, बल्कि एक प्रेरणास्रोत भी हैं, जो यह सिखाते हैं कि जड़ों से जुड़े रहकर भी शिखर तक पहुंचा जा सकता है। प्रकाश माली का यह सफर अभी जारी है, और भविष्य में वे निश्चित रूप से और भी ऊंचाइयों को छूएंगे।