Chandrabhan Singh Aakya: Difference between revisions

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चंद्रभान सिंह आक्या

जन्म 5 सितंबर 1976
जन्म स्थान आक्या गांव, भदेसर, चित्तौड़गढ़, राजस्थान
निवास चित्तौड़गढ़, राजस्थान
शिक्षा मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर
शैक्षिक योग्यता एम.ए., एम.पी.एड.
व्यवसाय राजनीतिज्ञ, व्यवसाय और कृषि
पिता राम सिंह चौहान
माता राजेंद्र कुंवर
पति/पत्नी सुशीला कंवर


चंद्रभान सिंह आक्या राजस्थान के चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित निर्दलीय विधायक हैं। उन्होंने वर्ष 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पहचान बनाई। इससे पहले वे भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2013 और 2018 में विधायक रह चुके हैं।

चंद्रभान सिंह आक्या का राजनीतिक जीवन मुख्य रूप से चित्तौड़गढ़ क्षेत्र की राजनीति से जुड़ा रहा है। छात्र जीवन से ही उन्होंने संगठनात्मक और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया था। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़े रहे और वर्ष 1997 में कॉलेज अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव माना जाता है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा चित्तौड़गढ़ सीट से उनका टिकट नहीं दिए जाने के बाद उन्होंने पार्टी से अलग होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत को 6,823 मतों के अंतर से पराजित किया और राजस्थान विधानसभा की 16वीं विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए।

जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार

चंद्रभान सिंह आक्या का जन्म 5 सितंबर 1976 को राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर क्षेत्र के आक्या गांव में हुआ। उनके पिता का नाम राम सिंह चौहान और माता का नाम राजेंद्र कुंवर है। उनका परिवार चित्तौड़गढ़ क्षेत्र से जुड़ा रहा है।

उनका विवाह सुशीला कंवर से हुआ। उनकी पत्नी गृहिणी के रूप में परिवार का दायित्व संभालती हैं। चंद्रभान सिंह आक्या का निजी जीवन चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है।

उनका प्रारंभिक जीवन चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में बीता। युवा अवस्था से ही उनकी रुचि सामाजिक गतिविधियों और संगठनात्मक कार्यों में रही। छात्र जीवन के दौरान उन्होंने विद्यार्थी राजनीति में सक्रिय भागीदारी की, जिससे आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन की नींव तैयार हुई।

शिक्षा

चंद्रभान सिंह आक्या ने उच्च शिक्षा मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से प्राप्त की। उन्होंने वर्ष 2000 में इतिहास विषय में एम.ए. की शिक्षा पूरी की। इसके बाद वर्ष 2001 में उन्होंने शारीरिक शिक्षा में स्नातकोत्तर डिप्लोमा अर्थात एम.पी.एड. की योग्यता प्राप्त की।

शिक्षा के दौरान उनकी रुचि विद्यार्थी एवं संगठनात्मक गतिविधियों में भी रही। वर्ष 1997 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और कॉलेज अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

बाद में उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के साथ सामाजिक, व्यवसायिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई।

प्रारंभिक राजनीतिक जीवन

चंद्रभान सिंह आक्या का राजनीतिक जुड़ाव छात्र जीवन से ही शुरू हो गया था। वर्ष 1997 में उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से विद्यार्थी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और कॉलेज अध्यक्ष बने।

इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। संगठन में काम करने के साथ-साथ वे चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करते गए।

राजनीति के साथ उन्होंने व्यवसाय और कृषि से भी अपना जुड़ाव बनाए रखा। उनके राजनीतिक जीवन में स्थानीय स्तर के संगठनात्मक कार्य और क्षेत्रीय जनसंपर्क महत्वपूर्ण रहे।

राजनीतिक जीवन

चंद्रभान सिंह आक्या पहली बार वर्ष 2013 में चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में राजस्थान विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। वर्ष 2013 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह को पराजित किया। उन्हें 85,391 मत मिले और वे लगभग 11,850 मतों के अंतर से विजयी हुए।

वर्ष 2018 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें दोबारा चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया। उन्होंने इस चुनाव में भी जीत हासिल की। वर्ष 2018 में उन्हें 1,06,563 मत प्राप्त हुए और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत को 23,894 मतों के अंतर से हराया।

विधानसभा सदस्य के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने राजस्थान विधानसभा की गतिविधियों में भाग लिया। वे स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित विधानसभा समिति के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

वर्ष 2023 में भारतीय जनता पार्टी ने चित्तौड़गढ़ विधानसभा सीट से चंद्रभान सिंह आक्या को टिकट नहीं दिया और उनकी जगह नरपत सिंह राजवी को उम्मीदवार बनाया। टिकट नहीं मिलने के बाद आक्या ने भाजपा से अलग होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।

उन्होंने अपने समर्थकों के साथ चुनाव मैदान में उतरकर चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया। चुनाव में उनका मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह जाड़ावत और भाजपा के नरपत सिंह राजवी से हुआ।

वर्ष 2023 के चुनाव में चंद्रभान सिंह आक्या को 98,446 मत प्राप्त हुए। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत को 6,823 मतों से हराया। भाजपा प्रत्याशी नरपत सिंह राजवी तीसरे स्थान पर रहे। इस जीत के साथ आक्या लगातार तीसरी बार चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए, हालांकि इस बार उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता।

संघर्ष और महत्वपूर्ण घटनाएँ

चंद्रभान सिंह आक्या के राजनीतिक जीवन में वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ रहा। भाजपा द्वारा टिकट नहीं दिए जाने के बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्णय के विरुद्ध चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया।

भाजपा ने चित्तौड़गढ़ से नरपत सिंह राजवी को प्रत्याशी बनाया था। टिकट कटने के बाद आक्या ने अपने समर्थकों के साथ कई जनसभाएं और सम्मेलन किए। उन्होंने चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में अपने राजनीतिक जनाधार को लेकर सक्रिय अभियान चलाया।

चुनाव के दौरान उनके समर्थन में मेवाड़ स्वाभिमान और महिला सम्मेलन सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने अपने समर्थकों को एकजुट किया और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव अभियान चलाया।

चुनाव परिणाम में उनकी जीत ने राजस्थान की राजनीति में विशेष ध्यान आकर्षित किया। भाजपा के संगठनात्मक रूप से मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज करना उनके राजनीतिक प्रभाव की महत्वपूर्ण घटना रही।

चुनाव जीतने के बाद उन्होंने क्षेत्रीय मुद्दों और विकास कार्यों को लेकर अपनी प्राथमिकताओं पर जोर दिया। विधानसभा सदस्य के रूप में उन्होंने कानून-व्यवस्था और स्थानीय विकास को प्रमुख विषयों में शामिल किया।

विधानसभा में भूमिका और राजनीतिक गतिविधियाँ

चंद्रभान सिंह आक्या वर्ष 2013 से चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं, हालांकि वर्ष 2023 के बाद उनका राजनीतिक दल निर्दलीय है।

विधानसभा में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर भागीदारी की। उनके दूसरे कार्यकाल के दौरान विधानसभा की स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित समिति में भी उनकी भूमिका रही।

वर्ष 2023 के बाद निर्दलीय विधायक के रूप में उनकी भूमिका पहले के भाजपा कार्यकाल से अलग रही। उन्होंने क्षेत्रीय जनता से जुड़े मुद्दों को विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर उठाने पर जोर दिया।

उनकी राजनीति का मुख्य आधार चित्तौड़गढ़ क्षेत्र रहा है और वे स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क तथा क्षेत्रीय समस्याओं को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाने के लिए सक्रिय रहे हैं।

उपलब्धियाँ और प्रभाव

चंद्रभान सिंह आक्या की प्रमुख राजनीतिक उपलब्धि चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतना है। वर्ष 2013 और 2018 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की, जबकि वर्ष 2023 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की।

वर्ष 2023 की जीत विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही क्योंकि उन्होंने बिना किसी प्रमुख राजनीतिक दल के चुनाव चिह्न के विधानसभा चुनाव में सफलता प्राप्त की। उन्होंने कांग्रेस और भाजपा दोनों के प्रत्याशियों के बीच हुए मुकाबले में जीत हासिल की।

उनकी राजनीतिक यात्रा यह भी दर्शाती है कि स्थानीय जनसंपर्क और क्षेत्रीय राजनीतिक आधार किसी उम्मीदवार को दलगत परिस्थितियों के बावजूद चुनावी सफलता दिला सकता है।

चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र में उनका लंबे समय से राजनीतिक जुड़ाव रहा है। लगातार चुनाव जीतने के कारण वे क्षेत्र की राजनीति में प्रभावशाली स्थानीय नेताओं में शामिल रहे हैं।

व्यक्तित्व और विचार

चंद्रभान सिंह आक्या की राजनीतिक कार्यशैली में क्षेत्रीय जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों को महत्व दिया जाता रहा है। उन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत करते हुए स्थानीय और विधानसभा स्तर की राजनीति में अपनी पहचान बनाई।

उनकी राजनीतिक गतिविधियों में चित्तौड़गढ़ क्षेत्र के विकास, कानून-व्यवस्था और स्थानीय समस्याओं से जुड़े विषय प्रमुख रहे हैं। वर्ष 2023 के बाद निर्दलीय विधायक के रूप में भी उन्होंने क्षेत्रीय मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही।

उनकी राजनीति में समर्थकों के साथ सीधा संपर्क और स्थानीय स्तर पर जनसभाओं एवं सम्मेलनों के माध्यम से राजनीतिक संवाद महत्वपूर्ण रहा है।

निष्कर्ष

चंद्रभान सिंह आक्या राजस्थान के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत कर विधानसभा तक अपनी राजनीतिक यात्रा बनाई। उन्होंने वर्ष 2013 और 2018 में भाजपा के टिकट पर चित्तौड़गढ़ से विधानसभा चुनाव जीते और वर्ष 2023 में भाजपा से अलग होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ते हुए फिर जीत दर्ज की।

वर्ष 2023 की उनकी जीत उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव रही। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत को 6,823 मतों के अंतर से हराकर चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व बरकरार रखा। उनकी राजनीतिक यात्रा में संगठनात्मक अनुभव, स्थानीय जनसंपर्क और क्षेत्रीय राजनीति प्रमुख तत्व रहे हैं।

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