Jagdeep Dhankhar: Difference between revisions

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'''जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar )''' भारत के वरिष्ठ राजनेता, प्रसिद्ध विधिवेत्ता (एडवोकेट) तथा वर्तमान में भारत के उपराष्ट्रपति हैं। वे देश के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में वर्ष 2022 से कार्यरत हैं। इससे पूर्व वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रह चुके हैं। भारतीय राजनीति, संवैधानिक व्यवस्था और विधि क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव के कारण उन्हें एक प्रभावशाली सार्वजनिक व्यक्तित्व माना जाता है।
[[Category:भारतीय अधिवक्ता]]
'''जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar)''' भारत के वरिष्ठ राजनेता, अधिवक्ता तथा पूर्व उपराष्ट्रपति हैं। वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल, लोकसभा सांसद, राजस्थान विधानसभा सदस्य तथा केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। अगस्त 2022 में वे भारत के 14वें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए। बाद में जुलाई 2025 में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया।


== जगदीप धनखड़ का जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार ==
== परिचय ==
जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनूं जिले के किठाना गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम गोकुल चंद धनखड़ तथा माता का नाम केसरी देवी था। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े धनखड़ ने प्रारंभिक जीवन में शिक्षा और परिश्रम के माध्यम से आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।


== जगदीप धनखड़ की शिक्षा ==
जगदीप धनखड़ भारतीय राजनीति और विधि जगत के प्रमुख व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं। वे राजस्थान के झुंझुनूं जिले के एक किसान परिवार से आते हैं और अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद अधिवक्ता के रूप में स्थापित हुए।
जगदीप धनखड़ ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से भौतिक विज्ञान में स्नातक तथा एलएलबी (कानून) की डिग्री प्राप्त की। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वकालत के क्षेत्र में अपना सफल करियर बनाया और देश के प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं में शामिल हुए।


== जगदीप धनखड़ का राजनीतिक जीवन की शुरुआत ==
राजनीतिक जीवन में उन्होंने सांसद, विधायक, केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल और उपराष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से चर्चा में रहा।
जगदीप धनखड़ ने वर्ष 1989 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया। बाद में वे राजस्थान विधानसभा के सदस्य भी बने और राज्य राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।


== जगदीप धनखड़ का राज्यपाल के रूप में कार्यकाल ==
== जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार ==
जुलाई 2019 में जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया। राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल संवैधानिक मुद्दों और प्रशासनिक सक्रियता के कारण चर्चा में रहा। उन्होंने राज्य में संवैधानिक व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई।


== जगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल ==
जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनूं जिले के किठाना गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम '''गोकल चंद''' तथा माता का नाम '''केसरी देवी''' था। वे एक कृषक परिवार से संबंध रखते हैं।
वर्ष 2022 में जगदीप धनखड़ भारत के उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए। उपराष्ट्रपति के रूप में वे राज्यसभा के सभापति भी हैं और संसद की कार्यवाही संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके कार्यकाल में संसदीय प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।


== जगदीप धनखड़ का राजनीतिक और राष्ट्रीय महत्व ==
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के राजकीय विद्यालय में प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने घड़धाना के विद्यालय में अध्ययन किया तथा बाद में सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ में प्रवेश प्राप्त किया।
जगदीप धनखड़ को ग्रामीण पृष्ठभूमि से उठकर देश के उच्च संवैधानिक पद तक पहुँचने वाले नेताओं में गिना जाता है। विधि, राजनीति और प्रशासन तीनों क्षेत्रों में उनके अनुभव ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है।


== स्रोत ==
वर्ष 1979 में उनका विवाह '''डॉ. सुदेश धनखड़''' से हुआ। उनकी एक पुत्री '''कामना धनखड़''' हैं।
हिंदी विकिपीडिया — जगदीप धनखड़


भारत सरकार एवं संसद अभिलेख
== शिक्षा ==


सार्वजनिक राजनीतिक एवं संवैधानिक जानकारी स्रोत
जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विश्वविद्यालय से विज्ञान विषय में स्नातक (बी.एससी.) की शिक्षा प्राप्त की।


== संबंधित लेख ==
इसके बाद उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से विधि स्नातक (एलएलबी) की डिग्री प्राप्त की और अधिवक्ता के रूप में अपना पेशेवर जीवन प्रारंभ किया।
[[Bhairon Singh Shekhawat|भैरों सिंह शेखावत]]
 
== विधिक करियर ==
 
शिक्षा पूर्ण करने के बाद जगदीप धनखड़ ने राजस्थान उच्च न्यायालय तथा भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में कार्य किया।
 
वे देश के प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं में गिने जाने लगे और विभिन्न संवैधानिक तथा प्रशासनिक मामलों में अपनी कानूनी विशेषज्ञता के लिए पहचाने गए।
 
== राजनीतिक जीवन ==
 
जगदीप धनखड़ ने वर्ष 1989 में जनता दल के टिकट पर झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता और पहली बार सांसद बने।
 
वर्ष 1990 से 1991 तक वे केंद्र सरकार में संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे। इसके बाद उन्होंने राजस्थान की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
 
वर्ष 1993 में वे राजस्थान की किशनगढ़ विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए और वर्ष 1998 तक राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे।
 
बाद के वर्षों में वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।
 
== पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ==
 
जुलाई 2019 में जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
 
राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल काफी चर्चित रहा। इस दौरान राज्य सरकार और राजभवन के बीच कई संवैधानिक एवं प्रशासनिक मुद्दों को लेकर मतभेद भी सामने आए।
 
वे जुलाई 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे।
 
== भारत के उपराष्ट्रपति ==
 
जुलाई 2022 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया।
 
6 अगस्त 2022 को हुए चुनाव में उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार '''मार्गरेट अल्वा''' को पराजित किया। उन्हें 528 मत प्राप्त हुए जबकि मार्गरेट अल्वा को 182 मत मिले। इसके साथ ही वे भारत के 14वें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए।
 
11 अगस्त 2022 को उन्होंने भारत के उपराष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की। उपराष्ट्रपति के रूप में वे राज्यसभा के सभापति भी रहे।
 
== उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा ==
 
21 जुलाई 2025 को जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया।
 
उनका इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपा गया और बाद में स्वीकार कर लिया गया। इस प्रकार उनका कार्यकाल निर्धारित अवधि से पहले समाप्त हो गया।
 
== उपलब्धियाँ और प्रभाव ==
 
* भारत के 14वें उपराष्ट्रपति रहे
* पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे
* झुंझुनूं से लोकसभा सांसद निर्वाचित
* राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे
* केंद्र सरकार में राज्य मंत्री रहे
* वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पहचान
* राजस्थान के प्रमुख जाट नेताओं में शामिल
 
== व्यक्तित्व और विचार ==
 
जगदीप धनखड़ को स्पष्ट वक्ता, संवैधानिक विषयों के जानकार और प्रशासनिक अनुभव वाले नेता के रूप में जाना जाता है।
 
वे लोकतांत्रिक संस्थाओं, संसदीय परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों पर अपने विचार खुलकर व्यक्त करते रहे हैं। सार्वजनिक जीवन में उनकी पहचान एक अनुभवी विधिवेत्ता और राजनेता के रूप में स्थापित है।
 
== निष्कर्ष ==


[[Jaswant Singh Jasol|जसवंत सिंह]]
'''जगदीप धनखड़''' भारतीय राजनीति और विधि जगत के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों में से एक हैं। किसान परिवार से निकलकर अधिवक्ता, सांसद, विधायक, राज्यपाल और उपराष्ट्रपति बनने तक का उनका सफर उल्लेखनीय माना जाता है।


[[Vasundhara Raje Cindia|वसुंधरा राजे]]
राजस्थान से राष्ट्रीय राजनीति तक उनकी यात्रा भारतीय लोकतंत्र में जनप्रतिनिधित्व और सार्वजनिक सेवा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करती है।


[[Mohanlal Sukhadia|मोहनलाल सुखाड़िया]]
== संबंधित लेख ==


[[Ashok Gehlot|अशोक गहलोत]]
* [[Sanjay Sharma|संजय शर्मा]]
* [[Sumit Godara|सुमित गोदारा]]
* [[Kanhaiya Lal Choudhary|कन्हैयालाल चौधरी]]
* [[Hemant Meena|हेमंत मीणा]]
* [[Joraram Kumawat|जोराराम कुमावत]]


__INDEX__
[[Category:भारतीय राजनेता]]
[[Category:राजस्थान के सांसद]]
[[Category:राजस्थान के विधायक]]

Latest revision as of 09:25, 17 October 2026


जगदीप धनखड़

जन्म 18 मई 1951
जन्म स्थान किठाना, झुंझुनूं, राजस्थान, भारत
निवास नई दिल्ली, भारत
शिक्षा राजस्थान विश्वविद्यालय
शैक्षिक योग्यता बी.एससी., एलएलबी
व्यवसाय अधिवक्ता, राजनेता
पिता गोकल चंद
माता केसरी देवी
पति/पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़
बच्चे 1


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जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) भारत के वरिष्ठ राजनेता, अधिवक्ता तथा पूर्व उपराष्ट्रपति हैं। वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल, लोकसभा सांसद, राजस्थान विधानसभा सदस्य तथा केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। अगस्त 2022 में वे भारत के 14वें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए। बाद में जुलाई 2025 में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया।

परिचय

जगदीप धनखड़ भारतीय राजनीति और विधि जगत के प्रमुख व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं। वे राजस्थान के झुंझुनूं जिले के एक किसान परिवार से आते हैं और अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद अधिवक्ता के रूप में स्थापित हुए।

राजनीतिक जीवन में उन्होंने सांसद, विधायक, केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल और उपराष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से चर्चा में रहा।

जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार

जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनूं जिले के किठाना गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम गोकल चंद तथा माता का नाम केसरी देवी था। वे एक कृषक परिवार से संबंध रखते हैं।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के राजकीय विद्यालय में प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने घड़धाना के विद्यालय में अध्ययन किया तथा बाद में सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ में प्रवेश प्राप्त किया।

वर्ष 1979 में उनका विवाह डॉ. सुदेश धनखड़ से हुआ। उनकी एक पुत्री कामना धनखड़ हैं।

शिक्षा

जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विश्वविद्यालय से विज्ञान विषय में स्नातक (बी.एससी.) की शिक्षा प्राप्त की।

इसके बाद उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से विधि स्नातक (एलएलबी) की डिग्री प्राप्त की और अधिवक्ता के रूप में अपना पेशेवर जीवन प्रारंभ किया।

विधिक करियर

शिक्षा पूर्ण करने के बाद जगदीप धनखड़ ने राजस्थान उच्च न्यायालय तथा भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में कार्य किया।

वे देश के प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं में गिने जाने लगे और विभिन्न संवैधानिक तथा प्रशासनिक मामलों में अपनी कानूनी विशेषज्ञता के लिए पहचाने गए।

राजनीतिक जीवन

जगदीप धनखड़ ने वर्ष 1989 में जनता दल के टिकट पर झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता और पहली बार सांसद बने।

वर्ष 1990 से 1991 तक वे केंद्र सरकार में संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे। इसके बाद उन्होंने राजस्थान की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।

वर्ष 1993 में वे राजस्थान की किशनगढ़ विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए और वर्ष 1998 तक राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे।

बाद के वर्षों में वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल

जुलाई 2019 में जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया।

राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल काफी चर्चित रहा। इस दौरान राज्य सरकार और राजभवन के बीच कई संवैधानिक एवं प्रशासनिक मुद्दों को लेकर मतभेद भी सामने आए।

वे जुलाई 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे।

भारत के उपराष्ट्रपति

जुलाई 2022 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया।

6 अगस्त 2022 को हुए चुनाव में उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को पराजित किया। उन्हें 528 मत प्राप्त हुए जबकि मार्गरेट अल्वा को 182 मत मिले। इसके साथ ही वे भारत के 14वें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए।

11 अगस्त 2022 को उन्होंने भारत के उपराष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की। उपराष्ट्रपति के रूप में वे राज्यसभा के सभापति भी रहे।

उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा

21 जुलाई 2025 को जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया।

उनका इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपा गया और बाद में स्वीकार कर लिया गया। इस प्रकार उनका कार्यकाल निर्धारित अवधि से पहले समाप्त हो गया।

उपलब्धियाँ और प्रभाव

  • भारत के 14वें उपराष्ट्रपति रहे
  • पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे
  • झुंझुनूं से लोकसभा सांसद निर्वाचित
  • राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे
  • केंद्र सरकार में राज्य मंत्री रहे
  • वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पहचान
  • राजस्थान के प्रमुख जाट नेताओं में शामिल

व्यक्तित्व और विचार

जगदीप धनखड़ को स्पष्ट वक्ता, संवैधानिक विषयों के जानकार और प्रशासनिक अनुभव वाले नेता के रूप में जाना जाता है।

वे लोकतांत्रिक संस्थाओं, संसदीय परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों पर अपने विचार खुलकर व्यक्त करते रहे हैं। सार्वजनिक जीवन में उनकी पहचान एक अनुभवी विधिवेत्ता और राजनेता के रूप में स्थापित है।

निष्कर्ष

जगदीप धनखड़ भारतीय राजनीति और विधि जगत के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों में से एक हैं। किसान परिवार से निकलकर अधिवक्ता, सांसद, विधायक, राज्यपाल और उपराष्ट्रपति बनने तक का उनका सफर उल्लेखनीय माना जाता है।

राजस्थान से राष्ट्रीय राजनीति तक उनकी यात्रा भारतीय लोकतंत्र में जनप्रतिनिधित्व और सार्वजनिक सेवा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करती है।

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