Nritya Gopal Das: Difference between revisions
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Latest revision as of 18:15, 2 June 2026
महंत नृत्य गोपाल दास
| जन्म | 11 जून 1938 |
|---|---|
| जन्म स्थान | केरहला (कहोला) गाँव, मथुरा जिला, उत्तर प्रदेश, भारत |
| निवास | अयोध्या, उत्तर प्रदेश, भारत |
| शिक्षा | संस्कृत शिक्षा |
| शैक्षिक योग्यता | शास्त्री |
| व्यवसाय | संत, महंत, धार्मिक नेता |
| पति/पत्नी | अविवाहित (संन्यासी) |
महंत नृत्य गोपाल दास (Nritya Gopal Das) भारत के प्रसिद्ध संत, रामानंदी वैरागी परंपरा के महंत तथा अयोध्या के प्रमुख धार्मिक नेताओं में से एक हैं। वे अयोध्या स्थित मणिराम दास की छावनी के पीठाधीश्वर रहे हैं तथा राम जन्मभूमि न्यास और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदों पर कार्य कर चुके हैं। उन्हें राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख संतों में गिना जाता है।
राम मंदिर निर्माण के लिए चले लंबे आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका रही। मंदिर निर्माण से जुड़े संत समाज और संगठनों के बीच उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त है।
जन्म, प्रारंभिक जीवन और परिवार
महंत नृत्य गोपाल दास का जन्म 11 जून 1938 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के केरहला (कहोला) गाँव में हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन की ओर था।
कम आयु में ही उन्होंने सांसारिक जीवन से विरक्ति लेकर संत परंपरा को अपनाया और अयोध्या चले गए, जहाँ उन्होंने संत जीवन की दीक्षा प्राप्त की।
शिक्षा
महंत नृत्य गोपाल दास ने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद धार्मिक अध्ययन की ओर रुख किया। वे अयोध्या में महंत राम मनोहर दास के शिष्य बने और उनके मार्गदर्शन में आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण की। बाद में उन्होंने वाराणसी के संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री की उपाधि प्राप्त की।
आध्यात्मिक जीवन
वर्ष 1965 में मात्र 27 वर्ष की आयु में उन्हें महंत पद की जिम्मेदारी मिली। वे आगे चलकर अयोध्या की प्रसिद्ध मणिराम दास की छावनी के प्रमुख बने, जो अयोध्या के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों में से एक मानी जाती है।
उनके नेतृत्व में अनेक धार्मिक गतिविधियाँ संचालित हुईं। उन्होंने रामायण भवन, श्री चार धाम मंदिर और अन्य धार्मिक संस्थानों के विकास में योगदान दिया। वे वर्षों तक संत समाज के मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते रहे।
राम जन्मभूमि आंदोलन में भूमिका
महंत नृत्य गोपाल दास 1980 के दशक से राम जन्मभूमि आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे। वे उन प्रमुख संतों में शामिल थे जिन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के पक्ष में जनजागरण और धार्मिक नेतृत्व प्रदान किया।
रामचंद्र परमहंस के निधन के बाद वे राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख बने। बाद में राम मंदिर निर्माण के लिए गठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
5 अगस्त 2020 को अयोध्या में हुए राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम में वे प्रमुख संतों में शामिल रहे।
संघर्ष और महत्वपूर्ण घटनाएँ
राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान महंत नृत्य गोपाल दास कई महत्वपूर्ण घटनाओं के केंद्र में रहे। वर्ष 2001 में उन पर और उनके अनुयायियों पर हमला भी हुआ था, जिसमें वे बच गए थे।
आंदोलन के विभिन्न चरणों में उन्होंने संत समाज को एकजुट रखने तथा मंदिर निर्माण के पक्ष में अपनी भूमिका निभाई।
उपलब्धियाँ और प्रभाव
- मणिराम दास की छावनी के पीठाधीश्वर
- राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख
- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष
- राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख संतों में स्थान
- रामायण भवन एवं अन्य धार्मिक संस्थानों के विकास में योगदान
- संत समाज में व्यापक सम्मान एवं प्रभाव
व्यक्तित्व और विचार
महंत नृत्य गोपाल दास को सरल, अनुशासित और धर्मनिष्ठ संत माना जाता है। वे रामभक्ति, सनातन संस्कृति और धार्मिक शिक्षा के प्रसार के समर्थक रहे हैं। संत समाज में उन्हें एक प्रभावशाली आध्यात्मिक नेता के रूप में देखा जाता है।
स्वास्थ्य और सार्वजनिक जीवन
उन्नत आयु के कारण हाल के वर्षों में उनके स्वास्थ्य को लेकर कई बार समाचार सामने आए। इसके बावजूद वे धार्मिक गतिविधियों और राम मंदिर से जुड़े कार्यक्रमों में मार्गदर्शक भूमिका निभाते रहे हैं।
निष्कर्ष
महंत नृत्य गोपाल दास आधुनिक भारत के उन संतों में गिने जाते हैं जिनका नाम राम जन्मभूमि आंदोलन और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। धार्मिक नेतृत्व, संत परंपरा और मंदिर निर्माण के लिए उनके योगदान के कारण उन्हें देशभर में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।
स्रोत
- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
- राम जन्मभूमि न्यास अभिलेख
- India TV
- Times of India
- विभिन्न सार्वजनिक जीवनी स्रोत