Shri RajaRam Ji Bhagwan: Difference between revisions

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[[File:Rajaramji maharaj.jpg|thumb|Shri Rajaram Ji Bhagwan]]
{{DISPLAYTITLE: श्री राजारामजी महाराज का जीवन परिचय | Shri Rajaram Ji Maharaj Biography}}
 
{{Biography infobox
== श्री राजारामजी महाराज जीवन परिचय ==
| name = श्री राजारामजी महाराज
श्री राजारामजी महाराज का जन्म चैत्र शुक्ला 9 संवत 1939 को, जोधपुर लूनी के गांव शिकारपुरा में, आंजणा कलबी वंश की सिहं खांप में एक गरीब किसान के घर हुआ था। जिस समय आपकी आयु लगभग दस वर्ष की थी आपके पिता श्री हरींगरामजी का देहांत हो गया और उसके कुछ समय बाद आपकी माता श्रीमती मोतीबाई का भी स्वर्गवास हो गया।
| image = Shri RajaRam Ji Maharaj.jpeg
| birth = चैत्र शुक्ल 9 संवत 1939
| birthplace = शिकरपुरा, जोधपुर, राजस्थान, भारत
| residence = शिकरपुरा धाम, जोधपुर, राजस्थान, भारत
| education =
| qualification = आध्यात्मिक शिक्षा
| profession = संत, आध्यात्मिक गुरु
| father = श्री हरींगरामजी
| mother = मोतीबाई
| spouse =
| children =  
| website = https://www.rajeshwardham.com/
}}
'''श्री राजारामजी महाराज (shri Rajaram ji Maharaj shikarpura Dhaam)''' का जन्म चैत्र शुक्ला 9 संवत 1939 को, जोधपुर लूनी के गांव शिकारपुरा में, आंजणा कलबी वंश की सिहं खांप में एक गरीब किसान के घर हुआ था। जिस समय आपकी आयु लगभग दस वर्ष की थी आपके पिता श्री हरींगरामजी का देहांत हो गया और उसके कुछ समय बाद आपकी माता श्रीमती मोतीबाई का भी स्वर्गवास हो गया।


माता- पिता के मृत्योपरांत आपके बड़े भाई श्री रघुनाथरामजी नंगे सन्यासियों की जमात में चले गये और आप कुछ समय तक अपने चाचा श्री थानारामजी व कुछ समय अपने मामा श्री मादारामजी भूरिया, गांव धांधिया के पास रहने लगे। बाद में शिकारपुरा के रबारियों की सांडियों रोटी कपड़ो के बदले एक साल तक चराई और गांव की गांये भी बिना हाथ में लाठी लिये नंगे पाव दो साल तक राम रटते चराई।
माता- पिता के मृत्योपरांत आपके बड़े भाई श्री रघुनाथरामजी नंगे सन्यासियों की जमात में चले गये और आप कुछ समय तक अपने चाचा श्री थानारामजी व कुछ समय अपने मामा श्री मादारामजी भूरिया, गांव धांधिया के पास रहने लगे। बाद में शिकारपुरा के रबारियों की सांडियों रोटी कपड़ो के बदले एक साल तक चराई और गांव की गांये भी बिना हाथ में लाठी लिये नंगे पाव दो साल तक राम रटते चराई।


== श्री राजाराम जी महाराज की आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत ==
गांव की खाली छोड़ने के बाद आपने गांव के ठाकुर के घर 12 रोटियां प्रतिदिन व कपड़ों के बदले हाली का काम संभाल लिया। इस समय आपके होठ केवल ईश्वर के नाम रटने में ही हिला करते थे। एक दिन आपके मन में दान पुण्य करने का विचार आया लेकिन आप एक संपति रहित व्यक्ति होने के कारण दान पुण्य में देने के लिए अपने पास अन्य कोई वस्तु न देखकर अपने को मिलने वाले भोजन का आधा भाग नियमित रूप से कुत्तो को डालना शुरू कर दिया। जिसकी शिकायत ठाकुर से होने पर ठाकुर ने 12 सोगरा के स्थान पर 6 सोगरा, फिर 6 से 3 सोगरां व 3 सोगरा व 3 से 1 सोगरा ही प्रतिदिन भेजना शुरू कर दिया। लेकिन दानवीर ने दानशीलता न छोड़ी और आधा भाग नियमित रूप से कुत्तो को डालते ही रहे।
गांव की खाली छोड़ने के बाद आपने गांव के ठाकुर के घर 12 रोटियां प्रतिदिन व कपड़ों के बदले हाली का काम संभाल लिया। इस समय आपके होठ केवल ईश्वर के नाम रटने में ही हिला करते थे। एक दिन आपके मन में दान पुण्य करने का विचार आया लेकिन आप एक संपति रहित व्यक्ति होने के कारण दान पुण्य में देने के लिए अपने पास अन्य कोई वस्तु न देखकर अपने को मिलने वाले भोजन का आधा भाग नियमित रूप से कुत्तो को डालना शुरू कर दिया। जिसकी शिकायत ठाकुर से होने पर ठाकुर ने 12 सोगरा के स्थान पर 6 सोगरा, फिर 6 से 3 सोगरां व 3 सोगरा व 3 से 1 सोगरा ही प्रतिदिन भेजना शुरू कर दिया। लेकिन दानवीर ने दानशीलता न छोड़ी और आधा भाग नियमित रूप से कुत्तो को डालते ही रहे।


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शाम के समय श्री राजारामजी ईश्वर का नाम लेकर ठाकुर के यहां भोजन करने के लिए गये। आपने बातो ही बातों में साढ़े सात किलो वजन के आटे के सोला सोगरा अरोग ली फिर भी आपको भूख मिटाने का आभास नहीं हुआ । ठाकुर व उसकी पत्नी यह देखकर अचरज करने लगे। उसी दिन शाम को श्री राजारामजी अपना हाली का धंधा ठाकुर को सौंपकर तालाब पर जोगमाया के मंदिर में आकर राम नाम रटने बैठ गये। उधर गांव के लोगो को चमत्कार का समाचार मिलने पर उनके दर्शनो के लिए आने का तांता बंध गया।
शाम के समय श्री राजारामजी ईश्वर का नाम लेकर ठाकुर के यहां भोजन करने के लिए गये। आपने बातो ही बातों में साढ़े सात किलो वजन के आटे के सोला सोगरा अरोग ली फिर भी आपको भूख मिटाने का आभास नहीं हुआ । ठाकुर व उसकी पत्नी यह देखकर अचरज करने लगे। उसी दिन शाम को श्री राजारामजी अपना हाली का धंधा ठाकुर को सौंपकर तालाब पर जोगमाया के मंदिर में आकर राम नाम रटने बैठ गये। उधर गांव के लोगो को चमत्कार का समाचार मिलने पर उनके दर्शनो के लिए आने का तांता बंध गया।


== श्री राजाराम जी महाराज की द्वारका यात्रा और चमत्कार ==
दूसरे दिन आपने द्वारका तीर्थ करने का विचार किया और आप दंडवंत करते करते द्वारका रवाना हुए। पांच दिनों में शिकारपुरा से पारलू पहुंचे और एक पीपल के पेड़ के नीचे हजारो नर नारियों के बीच अपना आसान जमाया और उनके बीच से एकाएक इस प्रकार गायब हुए कि किसी को पता न लगा।
दूसरे दिन आपने द्वारका तीर्थ करने का विचार किया और आप दंडवंत करते करते द्वारका रवाना हुए। पांच दिनों में शिकारपुरा से पारलू पहुंचे और एक पीपल के पेड़ के नीचे हजारो नर नारियों के बीच अपना आसान जमाया और उनके बीच से एकाएक इस प्रकार गायब हुए कि किसी को पता न लगा।


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तालाब पानी से भरा  
तालाब पानी से भरा  


मारे हुए बकरे को जिंदा किया  
मरे हुए बकरे को जिंदा किया  


कुदरती गुफा का निर्माण  
कुदरती गुफा का निर्माण  
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नांगा की जमात को पथर से चिपकाया  
नांगा की जमात को पथर से चिपकाया  


पानी मे पथर तैराया जेठमल को बुढ़ापा मे पुत्र दिया  
पानी मे पथर तैराया  
 
जेठमल को बुढ़ापा मे पुत्र दिया  


इस प्रकार के कुछ 41 से ज्यादा चमत्कार किए।
इस प्रकार के कुछ 41 से ज्यादा चमत्कार किए।
Line 45: Line 62:
महादेवजी के उपासक होने के कारण आपने शिकारपुरा तालाब पर एक महादेवजी का मंदिर बनवाया, जिसको आजकल हम श्री राजारामजी के जुना मंदिर के नाम से पुकारते है । जिसकी प्रतिष्ठा करते समय अपने भाविकों व साधुओं का सत्कार करने के लिए प्रसाद के स्वरूप नाना प्रकार के पकवान बनवाये जिसमें 250 क्विंटल घी खर्च किया गया। उस मंदिर के बन जाने पर आपके बड़े भाई रघुनाथरामजी भी जमात से पधार गये और दो साल साथ साथ तपस्या करने के बाद श्री रघुनाथरामजी ने समाधि ले ली। आपके भाई की समाधि के बाद आपने अपने स्वयं के रहने के लिए एक बगीची बनाई, जिसको आजकल श्री राजारामजी आश्रम के नाम से पुकारा जाता है ।  
महादेवजी के उपासक होने के कारण आपने शिकारपुरा तालाब पर एक महादेवजी का मंदिर बनवाया, जिसको आजकल हम श्री राजारामजी के जुना मंदिर के नाम से पुकारते है । जिसकी प्रतिष्ठा करते समय अपने भाविकों व साधुओं का सत्कार करने के लिए प्रसाद के स्वरूप नाना प्रकार के पकवान बनवाये जिसमें 250 क्विंटल घी खर्च किया गया। उस मंदिर के बन जाने पर आपके बड़े भाई रघुनाथरामजी भी जमात से पधार गये और दो साल साथ साथ तपस्या करने के बाद श्री रघुनाथरामजी ने समाधि ले ली। आपके भाई की समाधि के बाद आपने अपने स्वयं के रहने के लिए एक बगीची बनाई, जिसको आजकल श्री राजारामजी आश्रम के नाम से पुकारा जाता है ।  


== श्री राजारामजी महाराज के उपदेश और शिक्षाएं ==
श्री राजारामजी महाराज ने संसारियों को अज्ञानता से ज्ञानता की ओर लाने के उद्देश्य से बच्चों को पढाने लिखाने पर जोर दिया। आपने जाति, धर्म, रंग आदि भेदों को दूर करने के लिए समय-समय पर अपने व्याख्यान दिये और बाल विवाह, कन्या विक्रय, मृत्युभोज जैसी समाज की बुराईयों का अंत करने का अथक प्रयत्न किया। आपने लोगों को नशीली वस्तुओं के प्रयोग से कोसों दूर रहने का उपदेश दिया और शोषण विहीन होकर ६ र्मात्माओं की तरह समाज में रहने का पथ प्रदर्शन किया। आप एक अवतार थे, इस संसार में आये और समाज के कमजोर वर्ग की सेवा करते हुए श्रावण वद 14 संवत 2000 को इस संसार को त्याग करने के उद्देश्य से जीवित समाधि लेकर चले गये।  
श्री राजारामजी महाराज ने संसारियों को अज्ञानता से ज्ञानता की ओर लाने के उद्देश्य से बच्चों को पढाने लिखाने पर जोर दिया। आपने जाति, धर्म, रंग आदि भेदों को दूर करने के लिए समय-समय पर अपने व्याख्यान दिये और बाल विवाह, कन्या विक्रय, मृत्युभोज जैसी समाज की बुराईयों का अंत करने का अथक प्रयत्न किया। आपने लोगों को नशीली वस्तुओं के प्रयोग से कोसों दूर रहने का उपदेश दिया और शोषण विहीन होकर ६ र्मात्माओं की तरह समाज में रहने का पथ प्रदर्शन किया। आप एक अवतार थे, इस संसार में आये और समाज के कमजोर वर्ग की सेवा करते हुए श्रावण वद 14 संवत 2000 को इस संसार को त्याग करने के उद्देश्य से जीवित समाधि लेकर चले गये।  


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वर्तमान में आश्रम में गुरूगादी की चौधी पीढी के रूप में श्री दयारामजी महाराज को महंत श्री की उपाधि से विभूषित किया गया । नव गादीपति श्री दयारामजी महाराज महंत है, लग्नशील है अतः आपके सानिध्य में समाज चहुंमुखी विकास के पथ पर आगे बढ रहा है एवं गुरूजी के दिये उपदेशों का प्रसार-प्रचार कर रहे हैं।
वर्तमान में आश्रम में गुरूगादी की चौधी पीढी के रूप में श्री दयारामजी महाराज को महंत श्री की उपाधि से विभूषित किया गया । नव गादीपति श्री दयारामजी महाराज महंत है, लग्नशील है अतः आपके सानिध्य में समाज चहुंमुखी विकास के पथ पर आगे बढ रहा है एवं गुरूजी के दिये उपदेशों का प्रसार-प्रचार कर रहे हैं।
== सोर्स - ==
* ग्रंथ - संत शिरोमणि श्री राजारामजी के उपदेश
* ग्रंथ - श्री राजेश्वरधाम एक पावन तीर्थ<br />
Category [[महापुरुष]]
[[Category:राजस्थान के देवी देवता]]
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